बच्चों को कंप्यूटर सिखाने वाले बन गये क्लर्क: 6130 स्कूलों में सिर्फ 1536 में चला स्मार्ट क्लास

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

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झारखंड में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब योजना दम तोड़ रही है. 6130 स्कूलों में मात्र 1536 में हो रहा उपयोग. जानें पूरी हकीकत और अगली रणनीति.

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वरीय संवाददाता, देवघर: झारखंड के सरकारी स्कूलों में बच्चों को हाईटेक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गयी स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब योजना विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. विभागीय सचिव की अध्यक्षता में 9 सितंबर 2026 को हुई रियल टाइम मॉनिटरिंग समीक्षा में योजना के संचालन को लेकर कई गंभीर कमियां सामने आयी हैं.

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झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेइपीसी) के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन की ओर से 10 सितंबर 2026 को जारी पत्र में स्मार्ट क्लास के अपेक्षित उपयोग नहीं होने और आईसीटी इंस्ट्रक्टरों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने पर गंभीर आपत्ति जतायी गयी है.

6130 स्कूलों में सिर्फ 1536 में हुआ स्मार्ट क्लास का इस्तेमाल

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त माह में राज्य के कुल 6130 स्मार्ट क्लास वाले स्कूलों में से मात्र 25.1 प्रतिशत यानी 1536 स्कूलों में ही स्मार्ट क्लास का उपयोग शिक्षण कार्य के लिए किया गया.

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि 87.3 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट क्लास का उपयोग निर्धारित 16 पीरियड के मानक से काफी कम पाया गया. इससे योजना के वास्तविक क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

खूंटी और गोड्डा में स्थिति सबसे चिंताजनक

रिपोर्ट में जिलावार स्थिति भी सामने आयी है. खूंटी और गोड्डा जैसे जिलों में 98 से 100 प्रतिशत तक स्कूल स्मार्ट क्लास योजना का अपेक्षित लाभ बच्चों को नहीं दे पा रहे हैं.

स्मार्ट क्लास के लिए संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उनका नियमित शिक्षण कार्य में उपयोग नहीं होना विभागीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय माना गया है.

आईसीटी इंस्ट्रक्टरों से कराया जा रहा क्लर्क का काम

समीक्षा के दौरान योजना से जुड़ी एक और गंभीर चूक सामने आयी. स्कूलों में बच्चों को कंप्यूटर और आईसीटी आधारित शिक्षा देने के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से बहाल आईसीटी इंस्ट्रक्टरों को जिला और प्रखंड कार्यालयों में गैर-शैक्षणिक यानी क्लर्क के कार्यों में लगाए जाने की बात सामने आयी है.

इस पर राज्य परियोजना निदेशक ने कड़ी आपत्ति जतायी है. संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में आईसीटी इंस्ट्रक्टरों को कार्यालयों में प्रतिनियुक्त किया गया.

हर जिले में नोडल पदाधिकारी होंगे नामित

स्थिति में सुधार के लिए अब प्रत्येक जिले में सहायक कंप्यूटर प्रोग्रामर या तकनीकी विशेषज्ञ को आईसीटी योजना का नोडल पदाधिकारी नामित करने का निर्देश दिया गया है.

नोडल पदाधिकारी योजना के संचालन और स्मार्ट क्लास के उपयोग की नियमित निगरानी करेंगे. उन्हें योजना की प्रगति और संचालन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी.

हर सप्ताह डीईओ को देनी होगी रिपोर्ट

निर्देश के अनुसार, नोडल पदाधिकारियों को योजना के संचालन की साप्ताहिक रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपनी होगी. विभाग ने लापरवाही बरतने वाले प्रतिष्ठानों और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.

योजना की विस्तृत समीक्षा के लिए 15 सितंबर को जिला नोडल पदाधिकारियों की ऑनलाइन बैठक आयोजित की जायेगी. बैठक में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के वास्तविक उपयोग की स्थिति की समीक्षा के साथ सुधार को लेकर आगे की रणनीति तय की जायेगी.

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