देवघर अभी एकेआइसी का हिस्सा नहीं, इंडस्ट्रियल पार्क के लिए भव्य' योजना से फंडिंग ले सकती है राज्य सरकार
सांसद निशिकांत दुबे का फ़ाइल फोटो। Prabhat Khabar Network
देवघर को अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (एकेआइसी) से जोड़ने की मांग पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सांसद को पत्र भेजकर बताया कि देवघर स्वीकृत औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं का हिस्सा नहीं है. हालांकि, राज्य सरकार 'भव्य' योजना के तहत देवघर में औद्योगिक पार्क विकसित करने पर विचार कर सकती है.
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से देवघर की कनेक्टिविटी का मामला
देवघर से संजीत मंडल की रिपोर्ट
देवघर : देवघर को अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (एकेआइसी) से जोड़ने की मांग पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे को पत्र भेजकर बताया है कि फिलहाल देवघर भारत सरकार से स्वीकृत औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं का हिस्सा नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि इससे देवघर में औद्योगिक गतिविधियों के विकास या एकेआइसी के प्रभाव क्षेत्र से उसके आर्थिक जुड़ाव की संभावना खत्म नहीं होती है.
सांसद ने 10 अगस्त को नियम 377 के तहत उठाया था मामला
मंत्री जितिन प्रसाद ने सितंबर 2026 में भेजे डेमी ऑफिशियल पत्र में कहा है कि डॉ निशिकांत दुबे ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में नियम 377 के तहत देवघर को अमृतसर-दिल्ली-कोलकाता औद्योगिक गलियारे से जोड़ने की आवश्यकता का मामला उठाया था. यह कॉरिडोर नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआइसीडीसी) के माध्यम से विकसित किया जा रहा है.
नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर कार्यक्रम का हिस्सा है एकेआइसी
केंद्र सरकार अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा को राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत विकसित कर रही है. इसमें ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (इडीएफसी) को मुख्य आधारभूत ढांचे के रूप में रखा गया है. औद्योगिक गलियारे का प्रभाव क्षेत्र वह व्यापक भौगोलिक और आर्थिक क्षेत्र है, जहां गलियारे से मिलने वाले लाभ पहुंचने की उम्मीद है.
नोड तय करने में कई पहलुओं का होता है आकलन
केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि कॉरिडोर के नोड का स्थान तय करते समय मुख्य परिवहन आधारभूत ढांचे के साथ संबंध, माल ढुलाई एवं लॉजिस्टिक्स प्रवाह, मौजूदा और प्रस्तावित आधारभूत संरचना, भूमि की उपलब्धता एवं उपयुक्तता, पर्यावरणीय और भौतिक बाधाओं, आर्थिक क्षमता तथा प्रभावी ट्रंक और बाहरी कनेक्टिविटी की जरूरत जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है. स्वीकृत एलाइनमेंट में कोई महत्वपूर्ण बदलाव पूरे कॉरिडोर की मास्टर प्लानिंग और आधारभूत संरचना के व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.
देवघर एकेआइसी की स्वीकृत परियोजनाओं में नहीं
एकेआइसी के मामले में देवघर वर्तमान में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं का हिस्सा नहीं है. हालांकि, केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि देवघर में औद्योगिक गतिविधियों का विकास नहीं हो सकता या एकेआइसी के प्रभाव क्षेत्र के साथ देवघर का आर्थिक जुड़ाव नहीं हो सकता.
राज्य सरकार देवघर में विकसित कर सकती है औद्योगिक पार्क
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में एक अहम रास्ता भी सुझाया है. उन्होंने कहा है कि इस संदर्भ में राज्य सरकार देवघर में औद्योगिक पार्क विकसित करने पर विचार कर सकती है. इसके लिए राज्य सरकार *‘भव्य’* योजना के तहत फंडिंग ले सकती है. पत्र के अनुसार प्रस्तावित औद्योगिक पार्क में क्षेत्रवार फोकस, भूमि की उपलब्धता, आधारभूत संरचना की योजना, बाहरी कनेक्टिविटी, निवेश की संभावनाएं, रोजगार सृजन तथा एकेआइसी के प्रभाव क्षेत्र के साथ प्रस्तावित जुड़ाव को स्पष्ट रूप से सामने रखना होगा.
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने डॉ निशिकांत दुबे को भेजा जवाब
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने यह जवाब सांसद डॉ निशिकांत दुबे को भेजा है. पत्र में उन्होंने सांसद द्वारा उठाये गये मामले के संदर्भ में जवाब देते हुए देवघर के लिए औद्योगिक पार्क के विकल्प को सामने रखा है.
देवघर में इंडस्ट्रियल पार्क से खुलेगा विकास का रास्ता: डॉ निशिकांत
देवघर को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है. केंद्र ने इंडस्ट्रियल पार्क के लिए राज्य सरकार के सामने रास्ता स्पष्ट किया है. अब राज्य सरकार को देवघर में इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना के दिशा में औद्योगिक क्षमता, कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ठोस प्रस्ताव तैयार करना चाहिए.” -डॉ निशिकांत दुबे, सांसद गोड्डा लोकसभा क्षेत्र.
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