देवघर की सील नन बैंकिंग कंपनियों के दफ्तर गायब!

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देवघर: देवघर जिले से 27 नन बैंकिंग कंपनियों के कार्यालय गायब हो गये हैं. अब सीबीआइ को ढूंढने से भी उन कार्यालयों का पता नहीं मिलेगा. क्योंकि जहां कार्यालय संचालित हो रहे थे, प्राय: सभी के बोर्ड तक गायब हो गये हैं. हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई का तकरीबन 50 करोड़ से भी अधिक लेकर […]

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देवघर: देवघर जिले से 27 नन बैंकिंग कंपनियों के कार्यालय गायब हो गये हैं. अब सीबीआइ को ढूंढने से भी उन कार्यालयों का पता नहीं मिलेगा. क्योंकि जहां कार्यालय संचालित हो रहे थे, प्राय: सभी के बोर्ड तक गायब हो गये हैं. हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई का तकरीबन 50 करोड़ से भी अधिक लेकर कंपनियां फरार हो गयी हैं.
यह राशि लोगों को वापस मिलेगी, इसकी दूर-दूर तक संभावना नहीं दिख रही है. पहले इस मामले की जांच देवघर पुलिस कर रही थी. उसके बाद सरकार ने इसे सीआइडी के सुपुर्द कर दिया. लेकिन यह मामला इतना पेचीदा और बड़ा था कि सीआइडी भी इसकी तह तक नहीं जा सकी. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने नन बैंकिंग कंपनियों के मामले को सीबीआइ के हवाले कर दिया. सीबीआइ के पास जब मामला गया तो लोगों को लगा कि शायद अब उनकी गाढ़ी कमाई का कुछ अंश भी मिल जाये, लेकिन जिस तरह से देर हो रही है, लोग मायूस हो रहे हैं.
कमरा तो वही है साइन बोर्ड बदल गया
जांच के बाद कार्यालय का सील खोला गया और दस्तावेजों को सीबीआइ अपने साथ ले गयी. इसके बाद अब 90 फीसदी नन बैंकिंग कंपनियों के कार्यालयों का नामोनिशान तक नहीं है. न कंपनी का कहीं साइन बोर्ड दिखता है और न ही कार्यालय. दरअसल अधिकांश कार्यालय भाड़े के मकानों में चल रहे थे. सभी जगह अब दूसरा कारोबार हो रहा है. कुछ अभी भी सील हैं. सीबीआइ की कार्रवाई के बाद मकान मालिकों के पौ बारह हो गये. सभी ने जल्दीबाजी में साइन बोर्ड तो हटा ही दिया, जिस कार्यालय को सील किया गया था, वहां सब कुछ हटाकर दूसरे भाड़ेदार रख दिये. इस तरह अब जब धरातल पर जांच होगी तो जिले में एक भी कार्यालय नहीं मिलेगा. क्योंकि कार्यालय का कमरा तो वही रहेगा लेकिन साइन बोर्ड बदल गये हैं.
अब तक नहीं हुई किसी की गिरफ्तारी
इस मामले में न तो पुलिस ने, न ही सीआइडी और न ही सीबीआइ ने किसी नन बैंकिंग कंपनी से जुड़े पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की है. जबकि नन बैंकिंग से संबंधित 27 कंपनियों में 2012 में छापेमारी हुई थी. तकरीबन दो-तीन साल बाद बड़ी मशक्कत के बाद इस मामले में एफआइआर हुई थी. सीबीअाइ ने देवघर में एक साथ सभी कार्यालयों का सील खोला और नन बैंकिंग कंपनियों के तमाम दस्तावेज और डिजिटल सुबूतों को सीबीआइ ने जब्त किया और अपने साथ ले गयी. लेकिन अन्य सामान कार्यालय में ही थे. लेकिन अब वे कहा हैं किसी को पता नहीं है.
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