बगैर मिट्टी के भी होगी सब्जियों की खेती

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देवघर : झारखंड के किसान इजरायल में कम पानी के साथ-साथ बगैर मिट्टी के खेती का भी गुर सीख रहे हैं. किसानों के दल में शामिल देवघर प्रखंड पदनबेहरा गांव के किसान वकील यादव अपने साथियों के साथ बुधवार को इजराइल में तेल अबीब के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की जानकारी ली. वकील ने फोन […]

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देवघर : झारखंड के किसान इजरायल में कम पानी के साथ-साथ बगैर मिट्टी के खेती का भी गुर सीख रहे हैं. किसानों के दल में शामिल देवघर प्रखंड पदनबेहरा गांव के किसान वकील यादव अपने साथियों के साथ बुधवार को इजराइल में तेल अबीब के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की जानकारी ली. वकील ने फोन पर बताया कि इजरायल में बारिश नहीं होने के कारण यहां समुद्र के पानी को रिसाइकलिंग कर लोग पीने से लेकर स्नान व खेती तक में उपयोग करते हैं. पूरे इजराइल में अंडरग्राउंड पाइप का जाल बिछाया गया है. पाइप के जरिये घर-घर व गांव-गांव तक जलापूर्ति होती है. यहां पानी बर्बाद करने करने वाले को पानी से वंचित तक रखने का प्रावधान है. ड्रीप एरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई )से यहां खेती में कैसे क्रांति आयी है, यह देखने का अवसर मिला है. मिट्टी में पानी की अधिक खपत होने की वजह से इजरायइल में स्वायल लेस (बगैर मिट्टी) के खेती की तकनीक अपनायी गयी है.

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बुधवार को ड्रीप एरिगेशन से बगैर मिट्टी के सभी प्रकार के पत्तेदार सब्जियों की खेती देखकर आश्चर्य हुआ. वकील ने बताया कि पॉली हाउस में ड्रीप एरिगेशन के जरिये बगैर मिट्टी वाले पौधों को पानी देकर पत्ता गोभी, ब्रोकली, पालक जैसी पत्तेदार सब्जियां व साग का उत्पादन हो रहा है. इन पौधों को 24 घंटे बूंद-बूंद पानी दिया जा रहा है. इस पानी को बर्बाद किये बगैर रोटेशन में दिया जा रहा है. अगर तीन घंटे पानी बंद हो जाये तो पौधे नष्ट हो जायेंगे. 24 घंटे पानी मिलने से 15 दिनों में पौधों में सब्जी तैयार जाता है. देवघर में भी यह प्रयोग कर खेती करने का प्रयास
किया जायेगा.
अनार की खेती व मार्केटिंग के तरीके बेहतर
वकील ने बताया कि तीन दिनों के दौरान उन्होंने फूड प्रोसेसिंग व अनार की खेती के बारे में जानी. ड्रीप एरिगेशन के जरिये ही अनार की खेती व पर्याप्त उत्पादन कर मार्केटिंग के तरीके बताये गये. मार्केटिंग के प्रोसेस भी बताये गये. कम पानी के फसलों में खाद का किस प्रकार उपयोग होता है, यह तकनीक बताया गयी. वकील ने बताया कि डेयरी में भी इजराइल तेजी से आगे बढ़ रहा है.
इजराइल में भी गोबर व गोमूत्र का है महत्व
इजराइल के नस्ल की गायें यहां 40 से 50 लीटर प्रतिदिन दूध दे रही है. गाय पालन का तरीके बिल्कुल अलग है. यहां गाय को अधिक खुला व हवादार जगहों पर रखा जाता है. गाय को पंखे के पास अनिवार्य रूप से रखा जाता है. गोबर व गोमूत्र साफ नहीं किया जाता है. गोबर पर ही गाय बैठती है. अधिक जमा होने पर गोबर हटाया जाता है. इजराइल के गो पालकों का कहना है कि गोबर व गोमूत्र मेडिसीन का काम करता है. इससे मक्खियां व कीड़े नहीं लगते. इजरायल के गोशाला में मक्खियां बिल्कुल नहीं देखी गयी. उन्होंने बताया कि जो कुछ भी यहां देखने व सीखने का मौका मिला इससे देवघर के किसानों को अवगत करायेंगे.
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