सरदार पंडा के वाद को खारिज करने का कोर्ट से किया आग्रह
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने काेर्ट में डाला पिटीशन, कहा: अधिकारों की मांग जायज नहीं सिविल जज एक अजय कुमार सिंह की अदालत में चल रहा है मामला बोर्ड ने सेशन जज चार के फैसले का दिया हवाला कहा: सरदार पंडा को वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार नहीं जजमेंट में नहीं है डीसी काे रिसिवर पद […]
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हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने काेर्ट में डाला पिटीशन, कहा: अधिकारों की मांग जायज नहीं
सिविल जज एक अजय कुमार सिंह की अदालत में चल रहा है मामला
बोर्ड ने सेशन जज चार के फैसले का दिया हवाला
कहा: सरदार पंडा को वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार नहीं
जजमेंट में नहीं है डीसी काे रिसिवर पद से मुक्त करने की बात
देवघर : अपने अधिकार के लिए कोर्ट पहुंचे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के सरदार पंडा की याचिका के विरुद्ध बुधवार को विशेष पदाधिकारी झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्याय बोर्ड भी कोर्ट पहुंचा है. बोर्ड की ओर से उनके अधिवक्ता निलांजन गांगुली ने कोर्ट में रिज्वाइंडर दाखिल किया है.
बोर्ड का कहना है कि टाइटिल अपील केस नंबर 27/2013 में सेशन जज चार ने जो फैसला दिया है उसमें कहा गया है कि वादी बाबा बैद्यनाथ मंदिर के सरदार पंडा के तौर पर नियुक्त होंगे, किंतु उनका अधिकार व कर्तव्य महज पूजा पाठ तक ही सीमित रहेगा. उन्हें कोई वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार नहीं होगा.
इतना ही नहीं डीसी को रिसीवर पद से मुक्त करने की बात का आदेश जजमेंट में नहीं है. प्रत्युत्तर में कहा गया है कि वादी का यह एक्सक्यूशन केस चलने योग्य नहीं है. उन्होंने इस वाद को खारिज करने की याचना की है.
सरदार पंडा का अधिकार केवल पूजा-पाठ
राजकीय अधिवक्ता ने मांगा समय
इस वाद में राजकीय अधिवक्ता बालेश्वर प्रसाद सिंह ने डीसी देवघर की ओर से समय की याचना की है. वादी की ओर से दाखिल पिटीशन का प्रत्युत्तर सरकार की ओर से दाखिल नहीं किया गया. समय आवेदन में कहा गया है कि डीसी श्रावणी मेला में व्यस्त हैं. इसके लिए एक माह का समय दिया जाय. कोर्ट ने सभी पक्षकारों की बहस सुनने के बाद तीन सप्ताह का समय दिया है. सुनवाई के लिए अगली तिथि 18 अगस्त को मुकर्रर कर दी है.
उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि फैसले के अनुसार सरदार पंडा को डीसी के स्तर से आवासन की सुविधा उपलब्ध करा दी गयी है. इतना ही नहीं खान-पान आदि की भी सुविधाएं प्रदत्त है. मानदेय के संबंध में बताया कि श्राइन बोर्ड इसका निर्धारण करेगी.
अजीतानंद ओझा व अन्य ने किया है केस
एक्सक्यूसन केस नंबर 7/2017 डिक्रीधारी अजीतानंद ओझा व अन्य की ओर से दाखिल किया गया है. इसमें सेशन कोर्ट के फैसले के अनुसार अधिकार दिलाने का अनुरोध किया है. साथ ही मुख्य ट्रस्टी बनाये जाने की भी याचना की गयी है. इसमें स्टेट ऑफ झारखंड व अन्य को विपक्षी बनाया गया है. वादी की ओर से भी न्याय बोर्ड की ओर से दाखिल आवेदन का प्रत्युत्तर दाखिल कर दिया गया है. इनके अधिवक्ता केसी तिवारी व अन्य हैं.
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