खुदाई के दौरान मिली 11वीं शताब्दी की उमा महेश्वर प्रतिमा

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प्रतिमा मिलने से इलाके में उत्साह का माहौल है.

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इटखोरी . प्रखंड के करनी गांव में शनिवार को बमनी तालाब की खुदाई के दौरान प्राचीन उमा महेश्वर की प्रतिमा मिलने से इलाके में उत्साह का माहौल है. तालाब की खुदाई के दौरान अचानक जमीन के अंदर से निकली प्रतिमा को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में फैल गयी और बड़ी संख्या में लोग प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंचने लगे. मिली प्रतिमा ब्लैक बसाल्ट पत्थर से निर्मित है और इसकी बनावट काफी प्राचीन प्रतीत होती है. प्रतिमा उमा महेश्वर की आलिंगन मुद्रा में है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती साथ दिखायी दे रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक स्थापित कर पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी है. मामले की जानकारी मिलने पर पुरातत्वविद डॉ हरेंद्र सिन्हा ने प्रतिमा का अवलोकन किया. उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा लगभग 11वीं शताब्दी की पालकालीन प्रतिमा है. उन्होंने कहा कि प्रतिमा में भगवान शिव का हाथ माता पार्वती की पीठ की ओर दर्शाया गया है, जो उमा महेश्वर की आलिंगन मुद्रा की विशेष शैली को दर्शाता है. डॉ सिन्हा के अनुसार, प्रतिमा ब्लैक बसाल्ट स्टोन की बनी हुई है, जिसका उपयोग पाल काल में व्यापक रूप से किया जाता था. प्रतिमा की कलात्मक बनावट और शिल्प शैली उस काल की उत्कृष्ट कला परंपरा को प्रदर्शित करती है. प्रतिमा मिलने से क्षेत्र के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को भी नयी पहचान मिलने की संभावना जतायी जा रही है.

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