34 में से सिर्फ 13 डॉक्टर! भगवान भरोसे चंपुआ अनुमंडल अस्पताल, जानें पूरी रिपोर्ट
चंपुआ एसडीएमओ से वार्ता करते लोग
चंपुआ अनुमंडल अस्पताल में डॉक्टरों के 34 में से मात्र 13 पद भरे हैं. स्थानीय लोगों ने ट्रॉमा सेंटर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर आवाज उठाई है.
जैंतगढ़: चंपुआ अनुमंडल अस्पताल इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है. डॉक्टरों की भारी कमी के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों, अधिवक्ताओं और समाजसेवियों में भारी रोष व्याप्त है, जिसके समाधान के लिए एक प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल प्रबंधन से मुलाकात की.
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स्वीकृत 34 के मुकाबले मात्र 13 डॉक्टर तैनात
अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 34 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 13 डॉक्टर ही कार्यरत हैं. डॉक्टरों के 21 पद लंबे समय से खाली पड़े होने के कारण ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाओं तक पर बुरा असर पड़ रहा है. इस जनसमस्या को लेकर अधिवक्ता रमेश प्रधान, महेंद्र महांता, रोगी कल्याण समिति के तरुण साहू, ह्यूमन राइट्स कार्यकर्ता अबिद अंसारी, फैयाज अहमद, इस्तखार अहमद और अनिल साहू समेत कई गणमान्य लोग अस्पताल के प्रभारी एसडीएमओ डॉ. बीके दास से मिले. प्रतिनिधिमंडल ने डॉक्टरों के खाली पदों को शीघ्र भरने की पुरजोर मांग की.
ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में देरी पर उठे सवाल
बैठक के दौरान चंपुआ में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर के निर्माण को लेकर भी तीखी चर्चा हुई. प्रतिनिधियों ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के लिए मंजूरी मिलने के साथ ही भूमि भी उपलब्ध कराई जा चुकी है, फिर भी निर्माण और संचालन कार्य शुरू न होना चिंता का विषय है. लोगों ने सवाल उठाया कि गंभीर सड़क हादसों के समय मरीजों की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी इस सेंटर को आखिर कब तक धरातल पर उतारा जाएगा.
अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे सेवाओं को नियमित रखने मांग
अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच सेवाओं में आ रही बाधाओं पर भी गंभीर चिंता जताई गई. आम लोगों ने मांग की कि इन आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं को नियमित और सुचारु रूप से चलाया जाए, ताकि गरीब मरीजों को छोटी-छोटी जांच के लिए निजी अस्पतालों या दूरदराज के अन्य केंद्रों का रुख न करना पड़े. प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा.
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