गुरुओं को याद कर चमक उठीं आंखें, कहा : जीवन संवार दिया

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एसके मिश्रा, प्राचार्य, डीएवी सेक्टर-4 | Prabhat Khabar Network

गुरु की सीखें सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि जीवन की हर परिस्थिति में हमारा मार्गदर्शन करती हैं. बोकारो के स्कूलों के प्राचार्यों ने शिक्षक दिवस पर अपने गुरुओं को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी प्रेरणादायक शिक्षाओं ने उनके जीवन की दिशा तय की.

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गुरु से मिली सीख स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के साथ खत्म नहीं होती. मेहनत, अनुशासन, सम्मान, धैर्य और असफलताओं से सीखने की आदत जैसे गुण जीवन के हर पड़ाव पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं. शिक्षक दिवस के अवसर पर बोकारो के विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों ने अपने गुरुओं को याद किया, तो उनकी आंखों में पुरानी स्मृतियों की चमक दिखाई दी. उन्होंने बताया कि उनके गुरुओं की शिक्षा, प्रेरणा और मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

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विषय ज्ञान के साथ व्यावहारिक सीख भी देते हैं शिक्षक

शिक्षक का रिश्ता केवल किताबों, होमवर्क और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होता. एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने के साथ जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करना, सही निर्णय लेना और लगातार आगे बढ़ना भी सिखाता है. कई बार कक्षा में कही गयी शिक्षक की छोटी-सी बात वर्षों बाद भी याद रहती है और मुश्किल समय में रास्ता दिखाती है. बोकारो के प्राचार्यों की स्मृतियों में गुरु की ऐसी ही सीखें आज भी जीवंत हैं.

नहीं भूल सकता प्रो. डॉ. राम अवतार की प्रेरणा

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डॉ. एएस गंगवार, प्राचार्य, डीपीएस बोकारो | Prabhat Khabar Network

कानपुर विश्वविद्यालय से यूजी-पीजी की पढ़ाई के दौरान प्रो. डॉ. राम अवतार गंगवार मेरे सबसे पसंदीदा शिक्षक थे. वह रसायन विज्ञान के व्याख्याता थे. विषय पर उनकी गहरी पकड़ और विद्यार्थियों को व्यावहारिक, रोचक तथा स्नेहपूर्ण तरीके से पढ़ाने की शैली ने मन पर गहरी छाप छोड़ी. वह विषय की बारीकियों को सरलता से समझाते और हमेशा बेहतर पढ़ाई के लिए प्रेरित करते थे. सच कहूं तो आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें उनकी प्रेरणा की बड़ी भूमिका है.

डॉ. एएस गंगवार, प्राचार्य, डीपीएस बोकारो

बनारसी सिंह से सीखीं शिक्षक जीवन की बारीकियां

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नरमेंद्र कुमार, प्रभारी प्राचार्य, चिन्मय विद्यालय बोकारो | Prabhat Khabar Network

मैंने बीएसएल हाई स्कूल, सेक्टर-12 से आठवीं से दसवीं तक की पढ़ाई की. गणित के शिक्षक बनारसी सिंह ने मुझे बहुत प्रभावित किया. यहां बिताये तीन वर्ष आज भी मेरे जीवन के सबसे यादगार वर्षों में हैं. उनकी सबसे बड़ी खूबी विद्यार्थियों के साथ उनका निष्पक्ष व्यवहार था. उनका जीवन जितना अनुशासित था, उतने ही विद्यार्थी भी उनसे प्रभावित थे.

बाद में कोलंबस कॉलेज में प्रो. राधेश्याम प्रसाद ने भी मुझे प्रभावित किया. ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के विद्वान राधेश्याम सर की पढ़ाने की शैली मुझे बनारसी सर की याद दिलाती थी.

नरमेंद्र कुमार, प्रभारी प्राचार्य, चिन्मय विद्यालय बोकारो

पिता से सीखी छोटी खुशियों की अहमियत

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पी. शैलजा जयकुमार, प्राचार्या, श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल बोकारो| Prabhat Khabar Network

मेरे जीवन के पहले गुरु मेरे पिता सीपीए मेनन रहे, जिनसे छोटी-छोटी चीजों में खुशियां तलाशना सीखा. मां ने विनम्रता और सादगी का पाठ पढ़ाया. मैसूर के रीजनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर रहे देश के महान उपन्यासकार, शिक्षाविद् और समाज सुधारक एसएल भैरप्पा ने भी मुझे काफी प्रभावित किया.

डॉ. एमएस त्यागी ने मुझे पढ़ाने का पहला अवसर दिया. डॉ. हेमलता एस. मोहन ने विश्वास, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के जरिये छात्रों और शिक्षकों की क्षमताओं को निखारा. इन सभी शिक्षकों से मिली सीख आज भी मेरे लिए महत्वपूर्ण है.

पी. शैलजा जयकुमार, प्राचार्या, श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल बोकारो

रंजना मैम ने तब संभाला, जब खुद को नहीं संभाल पा रही थी

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डॉ. मनीषा तिवारी, निदेशिका सह प्राचार्या, डीपीएस चास | Prabhat Khabar Network

कक्षा 12 का वर्ष आमतौर पर बोर्ड परीक्षा की तैयारी का समय होता है, लेकिन मेरे लिए यह जिंदगी का सबसे कठिन दौर था. जिस दिन पिता का निधन हुआ, लगा जैसे मेरी दुनिया का आधार ही टूट गया. उस समय अंग्रेजी शिक्षिका रंजना चक्रवर्ती मेरे लिए सहारा बनीं.

वह रोज 20 मिनट अतिरिक्त समय देती थीं. यह समय अंग्रेजी पढ़ाने का नहीं, बल्कि यह जानने का होता था कि मैं कैसी हूं. उन्होंने मुझे दिनचर्या बनाने, लिखने और अपने जज्बात को शब्द देने की सीख दी. उन्होंने मुझे तब संभाला, जब मैं खुद को भी संभाल नहीं पा रही थी. उनकी संवेदनशीलता और मार्गदर्शन ने मुझे उस कठिन दौर से बाहर निकलने की ताकत दी.

डॉ. मनीषा तिवारी, निदेशिका सह प्राचार्या, डीपीएस चास

डॉ. आरपी सिन्हा ने ज्ञान के साथ जीवन जीना सिखाया

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एसके मिश्रा, प्राचार्य, डीएवी सेक्टर-4 | Prabhat Khabar Network

किसी गुरु के विराट व्यक्तित्व और महत्ता को शब्दों में बांधना कठिन है. सीएम साइंस कॉलेज, दरभंगा के जंतु विज्ञान विभाग के सम्मानित और ऊर्जावान शिक्षक डॉ. आरपी सिन्हा मेरे जीवन के ऐसे ही गुरु हैं. उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन ने मेरे जीवन की दिशा बदल दी.

उन्होंने केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन को समझने और उसे बेहतर तरीके से जीने की कला भी सिखायी. उनके व्यक्तित्व और शिक्षण शैली ने यह समझने में मदद की कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना भी है.

एसके मिश्रा, प्राचार्य, डीएवी सेक्टर-4
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