एसएनसीयू में बेड की कमी
Updated at : 07 Jul 2016 4:34 AM (IST)
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एसएनसीयू के सारे बेड अक्सर सदर अस्पताल की मातृ शिशु इकाई में जन्म लेनेवाले शिशुओं से ही भरे रहते हैं. चिकित्सकों का कहना है कि यहां बेडों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है. हाजीपुर : सदर अस्पताल स्थित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में शिशुओं के लिए बेड कम पड़ रहे हैं. वर्ष 2008 में बने […]
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एसएनसीयू के सारे बेड अक्सर सदर अस्पताल की मातृ शिशु इकाई में जन्म लेनेवाले शिशुओं से ही भरे रहते हैं. चिकित्सकों का कहना है कि यहां बेडों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है.
हाजीपुर : सदर अस्पताल स्थित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में शिशुओं के लिए बेड कम पड़ रहे हैं. वर्ष 2008 में बने एसएनसीयू में बेड की कमी के कारण सदर अस्पताल के बाहर से लाये जाने वाले नवजात शिशुओं को भरती करने में समस्या हो रही है. कुल 12 बेड वाले एसएनसीयू में अभी 14 शिशु भरती हैं. यूनिट में दो वार्ड बनाये गये हैं. एक वार्ड उन शिशुओं के लिए है, जिनका जन्म सदर अस्पताल में होता है. दूसरा वार्ड उन शिशुओं के लिए है,
जिनका जन्म जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों या अस्पतालों में हुआ हो और गंभीर अवस्था में यहां भेजे गये हों. स्थिति यह है कि एसएनसीयू के सारे बेड अक्सर सदर अस्पताल में जन्म लेनेवाले शिशुओं से ही भरे रहते हैं. चिकित्सकों का कहना है कि यहां बेडों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया है.
नाजुक हालत के नवजात को मिलता है नया जीवन : सदर अस्पताल परिसर में एसएनसीयू की जब स्थापना हुई, तो जन्म लेनेवाले अस्वस्थ बच्चों के लिए इसे वरदान माना गया. राज्य के किसी जिले में स्थापित यह पहला केंद्र था, जिसे यहां मॉडल के रूप में निर्मित किया गया था. स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में 12 रेडिएंट वार्मर, ऑक्सीजन कांसटेटर, फोटोथेरेपी, पल्स ऑक्सीमीटर तथा इंफ्यूजन पंप आदि आधुनिक चिकित्सीय उपकरण मौजूद हैं. इन्हीं उपकरणों के सहारे जन्म लेने के बाद मौत से जूझते बच्चों को नया जीवन प्रदान किया जाता है.
हालांकि इनमें कई बच्चों की मौत भी हो जाती है. एसएनसीयू में शिशु रोग के छह चिकित्सक और 13 नर्सें कार्यरत थी लेकिन अभी चिकित्सकों का अभाव तो है ही, नर्सों की संख्या भी घट कर 10 रह गयी है.
अभी एक ए ग्रेड नर्स के अलावा नौ एएनएम की ड्यूटी है. इस यूनिट में जन्म से लेकर 28-30 दिन तक के उन शिशुओं को भरती किया जाता है, जिनमें बर्थ स्पेसिया, एलबीडब्ल्यू यानी लो बर्थ वेट, पीलिया पीड़ित तथा प्री मेच्योर बेबी यानी समय से पूर्व जन्म लेनेवाले बच्चे होते हैं.
कम वजन के शिशु को किया जाता है भरती : अभी जो शिशु भरती हैं, उनमें कुछ पीलिया से पीड़ित हैं, तो कुछ लो बर्थ वेट वाले हैं. जबकि 7-8 शिशुओं को सांस लेने से संबंधित तकलीफ है. नाजकु हालत में कई शिशुओं को पीएमसीएच रेफर किये जाने के बावजूद उनके अभिभावक यहीं छोड़े रखते हैं. ऐसे शिशु की मौत हो जाने पर अभिभावक और उनके परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हल्ला-हंगामा और तोड़फोड़ पर उतारू हो जाते हैं. एसएनसीयू में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं.
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