अक्षय नवमी पर की गयी आंवले के वृक्ष की पूजा

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हाजीपुर : मंगलवार को अक्षय नवमी का पर्व मनाया गया. आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना की. आंवला वृक्ष के नीचे बैठ कर महिलाओं ने मंगल गीत गाये और कथा का श्रवण किया. अक्षय नवमी पर स्थान -ध्यान के लिए मंगलवार की सुबह नगर के कोनहार घाट समेत नारायणी नदी के अन्य घाटों पर महिलाओं की […]

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हाजीपुर : मंगलवार को अक्षय नवमी का पर्व मनाया गया. आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना की. आंवला वृक्ष के नीचे बैठ कर महिलाओं ने मंगल गीत गाये और कथा का श्रवण किया. अक्षय नवमी पर स्थान -ध्यान के लिए मंगलवार की सुबह नगर के कोनहार घाट समेत नारायणी नदी के अन्य घाटों पर महिलाओं की भीड़ जुटी.

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कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी, जिसे आंवला नवमी भी कहा जाता है. सनातन धर्म में इसकी विशेष महत्ता है. मान्यता है कि आंवले की उत्पत्ति ब्रह्माजी के आंसुओं से हुई थी.
आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है. इसलिए महिलाएं इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा कर संतान की रक्षा, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. अक्षय नवमी के मौके पर चंद्रालय में आंवला के वृक्ष के नीचे खीर का प्रसाद बनाकर बांटा गया. प्रसाद वितरण में आशुतोष तिवारी डीलर साहब, गुड्डू तिवारी, विनय पांडेय, हेमंत तिवारी, अनंत तिवारी, सुमंत तिवारी, कन्हाई ठाकुर आदि लोग शामिल हुए.
लालगंज. अक्षय नवमी को किया गया पाप-पुण्य सब अक्षय हो जाता है. इसलिए मनुष्य को इस दिन किसी भी प्रकार के पाप से दूर रहकर पुण्य का अर्जन करना चाहिए. ये बातें अखिल भारतीय धर्म संघ के प्रांतीय अध्यक्ष पंडित रमाशंकर शास्त्री ने कही. उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी भी वैसा कर्म नहीं करना चाहिए, जिससे पाप हो, अधर्म का मार्ग हमेशा ही दुखदायी होता है. रावण, कंस, दुर्योधन का उदाहरण देते हुए कहा कि अधर्म पर चलने के कारण उसका समूल नाश हो गया.
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