सुपौल में भगवान बलभद्र के जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का रंग, पूजा के बाद गूंजा संकीर्तन, दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु
पूजा अर्चना करते श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network
भगवान बलभद्र का जन्मोत्सव प्रतापगंज के पारख जैन भवन में धूमधाम से मनाया गया. सैकड़ों भक्तों ने मंत्रोच्चारण और सामूहिक आरती के बीच सुख-समृद्धि की कामना की. कार्यक्रम में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.
Bhagwan Balbhadra Janmotsav: प्रतापगंज. पारख जैन भवन का माहौल बुधवार को अचानक भक्तिमय हो उठा. परिसर में भगवान बलभद्र की प्रतिमा के सामने महिला, पुरुष और बच्चे एक साथ पूजा-अर्चना में जुटे थे. मंत्रोच्चारण के बीच आरती हुई तो श्रद्धालुओं ने सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. इसके बाद संकीर्तन की धुन गूंजी और पूरा परिसर भक्ति के रंग में डूब गया.
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मौका था ब्याहुत कलवार संघ की ओर से आयोजित कुलगुरु भगवान बलभद्र (बलराम) के जन्मोत्सव का. जन्मोत्सव को लेकर पारख जैन भवन को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. छातापुर, उधमपुर, जीवछपुर, पड़ियाही, मधुबनी, प्रतापगंज, सूरजापुर, सिमराही और सरायगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे.
मंत्रोच्चारण से सामूहिक आरती तक, श्रद्धालुओं ने की सुख-समृद्धि की कामना
जन्मोत्सव के दौरान परिसर में भगवान बलभद्र की प्रतिमा स्थापित की गयी. पंडित बलराम शर्मा के मंत्रोच्चारण के बीच श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. महिला, पुरुष और बच्चों ने उत्साह के साथ पूजा में भाग लिया. पूजा के बाद सामूहिक आरती की गयी.
इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र से परिवार, समाज और देश में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की. पूजा के संकल्पकर्ता ब्याहुत कलवार संघ के उपाध्यक्ष अवधेश कुमार भगत और उनकी पत्नी कंचन देवी थीं. दंपती ने विधिवत पूजा-अर्चना कर समाज, परिवार और देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की.
क्यों खास है भगवान बलभद्र की पूजा
पंडित बलराम शर्मा ने कहा कि ब्याहुत कलवार समाज के कुलगुरु भगवान बलभद्र की पूजा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान बलभद्र की आराधना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है.
उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र को शक्ति, बल और कृषि का देवता माना जाता है. उनकी आराधना से शारीरिक और मानसिक बल, साहस तथा पराक्रम की प्राप्ति का विश्वास है. उन्होंने कहा कि भगवान बलभद्र की पूजा के साथ होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का काम करते हैं.
पंडित बलराम शर्मा ने भगवान बलभद्र के सरल मंत्र ‘ॐ बलभद्राय नमः’ का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि भगवान बलराम को बलदेव, बलभद्र, संकर्षण, हलधर और हलायुध के नाम से भी जाना जाता है. वे भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई हैं.
संकीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम से भक्तिमय हुआ परिसर
जन्मोत्सव के अवसर पर केवल पूजा-अर्चना तक कार्यक्रम सीमित नहीं रहा. सांस्कृतिक कार्यक्रम, संकीर्तन और महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया. संकीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए. पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा.
बच्चों से लेकर महिलाओं और पुरुषों तक ने जन्मोत्सव कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया. अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने आयोजन को सामूहिक स्वरूप दिया. धार्मिक आयोजन के माध्यम से समाज के लोगों को एक साथ जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिला.
अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु, समाज की दिखी भागीदारी
संघ के आमंत्रण पर छातापुर, उधमपुर, जीवछपुर, पड़ियाही, मधुबनी, प्रतापगंज, सूरजापुर, सिमराही और सरायगढ़ सहित विभिन्न इलाकों से श्रद्धालु पहुंचे. सुबह से ही पारख जैन भवन में लोगों की आवाजाही बनी रही.
आयोजन में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी भी रही. पूजा-अर्चना, संकीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया. महाप्रसाद के आयोजन के साथ कार्यक्रम का समापन धार्मिक और सामुदायिक सहभागिता के माहौल में हुआ.
Bhagwan Balbhadra Janmotsav: आयोजन को सफल बनाने में संघ के सदस्यों ने निभायी भूमिका
ब्याहुत कलवार संघ के अध्यक्ष विमलेश कुमार भगत ने बताया कि जन्मोत्सव कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. उपाध्यक्ष अवधेश भगत, सचिव अभिषेक भगत, कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार भगत, पूर्व अध्यक्ष राजकिशोर भगत, अशोक भगत, राजकुमार भगत, संतोष भगत, कैलाश भगत, दीपक भगत, सौरभ भगत और बम-बम भगत सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन में सहयोग किया.
इस तरह भगवान बलभद्र का जन्मोत्सव पूजा-अर्चना, सामूहिक आरती, संकीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ. आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत की.
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