धनतेरस: बरतन व चांदी के सक्किों की हुई खरीदारी

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धनतेरस: बरतन व चांदी के सिक्कों की हुई खरीदारी फोटो- 06,कैप्सन- दुकान में इलेक्ट्रानिक समान देखते ग्राहक व टीवी, फ्रीज की दुकान के बाहर सजा समान.प्रतिनिधि सुपौल जिले भर में सोमवार को धनतेरस के मौके पर लोगों ने व्यापक स्तर पर जेवरात, बरतन, इलेक्ट्राॅनिक उपकरण आदि की खरीदारी की. अनुमान के मुताबिक धनतेरस के अवसर […]

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धनतेरस: बरतन व चांदी के सिक्कों की हुई खरीदारी फोटो- 06,कैप्सन- दुकान में इलेक्ट्रानिक समान देखते ग्राहक व टीवी, फ्रीज की दुकान के बाहर सजा समान.प्रतिनिधि सुपौल जिले भर में सोमवार को धनतेरस के मौके पर लोगों ने व्यापक स्तर पर जेवरात, बरतन, इलेक्ट्राॅनिक उपकरण आदि की खरीदारी की. अनुमान के मुताबिक धनतेरस के अवसर पर जिले में करीब दो करोड़ से अधिक कारोबार हुआ. पर्व को लेकर देर शाम तक बाजार में गहमागहमी बनी रही. भारी भीड़ की वजह से शाम में जिला मुख्यालय स्थित बाजार में कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी. हालांकि पुलिस अधीक्षक किम के निर्देश पर प्रमुख सड़कों व चौक -चौराहों पर सुरक्षा बल की तैनाती की गयी थी. ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल व महिला पुलिस के जवान जाम को हटा रहे थे. धनतेरस को लेकर बाजार में दुकानों पर सामान को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. विशेष कर ज्वेलरी व बरतन की दुकान लोगों को अपनी ओर खींच रहे थे. इन दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी गयी. चांदी के सिक्के की रही डिमांडधनतेरस के अवसर पर सबसे अधिक बिक्री बरतन व ज्वेलरी की रही. बरतन की दुकान में मौजूद ग्राहक स्टील, तांबे व पीतल के बरतन की खरीदारी में जुटे थे. वही दूसरी ओर ज्वेलरी की दुकानों में लोग सामर्थ्य के मुताबिक सोने-चांदी के जेवरात खरीद रहे थे, लेकिन सबसे अधिक डिमांड चांदी के सिक्कों की देखी गयी. मौके पर ज्वेलर द्वारा चांदी के पुराने सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा के सिक्के तथा चांदी के बिस्कुट आदि उपलब्ध कराये गये थे. यह दीगर बात है कि ग्राहक अपनी पसंद व मान्यताओं के मुताबिक इनकी खरीदारी कर रहे थे.धनतेरस के अवसर पर ग्राहकों ने इलेक्ट्राॅनिक समानों की भी जम कर खरीदारी की. टीवी, फ्रीज, वाशिंग मशीन आदि की बिक्री परवान पर रही. खरीदारी कर बनाया सगुन मान्यताओं के मुताबिक धनतेरस के अवसर पर बरतन व अन्य धातुओं की खरीद का काफी महत्व है. कहा जाता है कि इस अवसर पर खरीदा गया धन 13 गुणा हो जाता है. माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान देवताओं को कई महत्वपूर्ण चीजों की प्राप्ति हुई थी. इसी मौके पर स्वर्ण कलश के साथ देवी महालक्ष्मी का अभ्युदय हुआ था. वहीं आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि भी अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे. यही वजह है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के अवसर पर धन की देवी महालक्ष्मी एवं धन्वंतरि की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है.

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