सीवान सदर अस्पताल के एसएनसीयू में 13 इनक्यूबेटर, वेंटिलेटर नहीं; गंभीर नवजातों को करना पड़ता है रेफर

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सदर अस्पताल का एसएनसीयू

सीवान सदर अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में गंभीर नवजातों के इलाज पर सवाल उठ रहे हैं. 13 इनक्यूबेटर होने के बावजूद वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है, जिससे समय पर इलाज न मिलने का खतरा बढ़ रहा है. गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है.

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Siwan Hospital: सीवान सदर अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में गंभीर नवजातों के इलाज की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. यूनिट में 13 इनक्यूबेटर उपलब्ध हैं, लेकिन वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है. ऐसे में जब किसी नवजात को कृत्रिम वेंटिलेशन की जरूरत पड़ती है, तो उसे बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ता है.

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गंभीर नवजातों के इलाज में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में अस्पताल से दूसरे चिकित्सा केंद्र तक रेफर करने में लगने वाला समय बच्चे के लिए जोखिम बढ़ा सकता है.

छह इनक्यूबेटर सदर अस्पताल में जन्मे बच्चों के लिए

सदर अस्पताल के एसएनसीयू में छह इनक्यूबेटर सदर अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजातों के लिए रखे गये हैं. वहीं, छह इनक्यूबेटर निजी और अन्य अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए निर्धारित हैं.

इसके अलावा एक इनक्यूबेटर ट्रायज के लिए रखा गया है. ट्रायज में नवजात की प्रारंभिक स्थिति का आकलन कर यह तय किया जाता है कि उसे किस स्तर की चिकित्सा सहायता की जरूरत है.

सांस लेने में परेशानी वाले नवजातों के सामने चुनौती

एसएनसीयू में समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले, संक्रमण से पीड़ित, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी वाले और सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहे नवजातों को भर्ती किया जाता है.

कुछ बच्चों की स्थिति ऐसी हो सकती है कि ऑक्सीजन देने के बावजूद उनकी सांस सामान्य नहीं हो पाती. ऐसे मामलों में वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है. सदर अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सकों को बच्चे को उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर करना पड़ता है.

एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल तक पहुंचना भी चुनौती

गंभीर नवजात को रेफर करना केवल अस्पताल से छुट्टी और दूसरे अस्पताल भेजने तक सीमित नहीं है. बच्चे को सुरक्षित तरीके से दूसरे चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण होता है.

अस्पताल से निकलने, एंबुलेंस की उपलब्धता और दूसरे चिकित्सा संस्थान तक पहुंचने में लगने वाला समय गंभीर स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकता है. रास्ते में बच्चे की स्थिति बिगड़ने की आशंका से परिजनों की चिंता भी बढ़ जाती है.

गरीब परिवारों के लिए बढ़ सकती है परेशानी

सदर अस्पताल जिले के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र है. ऐसे में गंभीर नवजातों के लिए जीवनरक्षक सुविधा उपलब्ध नहीं होने का असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अधिक पड़ सकता है.

निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च हर परिवार के लिए वहन करना आसान नहीं होता. ऐसे में सरकारी अस्पताल में ही गंभीर नवजातों के लिए आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है.

एसएनसीयू को और मजबूत करने की जरूरत

नवजातों को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने और नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए एसएनसीयू की सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है. सदर अस्पताल में 13 इनक्यूबेटर की व्यवस्था होने के बावजूद वेंटिलेटर सुविधा का नहीं होना गंभीर नवजातों के उपचार में एक महत्वपूर्ण कमी को उजागर करता है.

एसएनसीयू में वेंटिलेटर समेत आवश्यक जीवनरक्षक उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ और गंभीर नवजातों के लिए बेहतर आपातकालीन व्यवस्था उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि गंभीर स्थिति वाले बच्चों को समय पर उपचार मिल सके.

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