सीवान जंक्शन में बाढ़ का भ्रामक वीडियो वायरल करने पर FIR, ‘फैयाज क्रिएट्स’ फेसबुक अकाउंट के खिलाफ केस

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सांकेतिक तस्वीर

सीवान जंक्शन रेलवे स्टेशन में बाढ़ का भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में साइबर थाने में कांड संख्या 62/26 दर्ज हुआ है. पुलिस अब फेसबुक खाते और वीडियो की तकनीकी जांच करेगी.

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Siwan Junction Flood Video: सीवान जंक्शन रेलवे स्टेशन परिसर में बाढ़ आने का भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में सीवान साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. रेलवे अधिकारियों की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में फेसबुक पर ‘फैयाज क्रिएट्स’ नाम से संचालित खाते के माध्यम से सीवान जंक्शन में बाढ़ आने से संबंधित भ्रामक वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है.

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सीवान जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि डीआरएम आशीष जैन के निर्देश पर साइबर थाना सीवान में कांड संख्या 62/26 दर्ज कराया गया है. शिकायत के अनुसार, दो सितंबर 2026 से उक्त फेसबुक खाते के माध्यम से सीवान जंक्शन रेलवे स्टेशन परिसर में बाढ़ आने से संबंधित पोस्ट, वीडियो अथवा रील प्रसारित की जा रही थी.

सीवान जंक्शन में बाढ़ का दिखाया गया भ्रामक वीडियो

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सीवान जंक्शन रेलवे स्टेशन परिसर में बाढ़ जैसी स्थिति दिखाई गयी है. हालांकि, वीडियो में दिखाया गया दृश्य सीवान जंक्शन की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता है. रेलवे की ओर से इसे भ्रामक सामग्री बताते हुए साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायी गयी है.

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गलत सूचना सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने से यात्रियों और आम लोगों के बीच रेलवे स्टेशन की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है. खासकर बाढ़ और रेल परिचालन जैसी संवेदनशील स्थिति से जुड़ी गलत जानकारी यात्रियों के बीच अनावश्यक भय और असमंजस पैदा कर सकती है.

रेलवे की शिकायत पर साइबर थाने में कांड दर्ज

स्टेशन अधीक्षक मुकेश कुमार सिंह की ओर से साइबर थाने को दिये गये आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. आवेदन में संबंधित फेसबुक खाते का नाम ‘फैयाज क्रिएट्स’, पोस्ट की तारीख दो सितंबर 2026 और पोस्ट का पता उपलब्ध कराया गया है.

वायरल वीडियो के दो पन्नों के छायाचित्र भी शिकायत के साथ संलग्न किये गये हैं. शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अन्य सामाजिक माध्यमों पर भी इस तरह के वीडियो के माध्यम से अफवाह फैलाने का प्रयास किया जा रहा है.

यात्रियों में गलत धारणा बनने की जतायी गयी आशंका

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सीवान जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान से जुड़ी गलत सूचना यात्रियों को गुमराह कर सकती है. सोशल मीडिया पर स्टेशन परिसर में बाढ़ आने का भ्रामक वीडियो प्रसारित होने से लोगों के बीच रेल परिचालन, स्टेशन की स्थिति और यात्री सुविधाओं को लेकर गलत धारणा बन सकती है.

ऐसी सामग्री के प्रसार से यात्रियों में अनावश्यक भय पैदा होने के साथ रेलवे की व्यवस्था और वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इसी वजह से रेलवे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाने में शिकायत दर्ज करायी है.

साइबर पुलिस करेगी वीडियो की तकनीकी जांच

कांड संख्या 62/26 दर्ज होने के बाद अब साइबर पुलिस मामले की तकनीकी जांच करेगी. जांच के दौरान संबंधित फेसबुक खाते के संचालक की पहचान करने के साथ वीडियो के वास्तविक स्रोत का पता लगाया जायेगा.

पुलिस यह भी जांच करेगी कि वीडियो में दिखाया गया स्थान वास्तव में कहां का है और उसे सीवान जंक्शन से जोड़कर किस तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया. इसके अलावा वीडियो को कितने लोगों ने देखा और इसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किस स्तर तक साझा किया गया, इसकी भी जानकारी जुटायी जायेगी.

वीडियो के वास्तविक स्रोत का लगाया जायेगा पता

जांच के दौरान साइबर पुलिस वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग और उसके प्रसारण से संबंधित तकनीकी साक्ष्य जुटा सकती है. संबंधित सोशल मीडिया खाते की गतिविधियों और पोस्ट से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेगी.

रेलवे अधिकारियों की शिकायत में उपलब्ध करायी गयी पोस्ट की तारीख, खाते का नाम और वीडियो के छायाचित्र भी जांच में महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं. हालांकि, वीडियो की वास्तविकता और उसे सीवान जंक्शन से जोड़कर प्रसारित किये जाने के संबंध में अंतिम स्थिति पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

सोशल मीडिया पर अफवाहों से सावधान रहने की अपील

रेलवे अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली ऐसी सामग्री को लेकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. अधिकारियों ने कहा कि किसी भी वीडियो, पोस्ट या रील को सही मानने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि करनी चाहिए.

विशेषकर रेलवे स्टेशन, रेल परिचालन, बाढ़ और आपदा जैसी महत्वपूर्ण सूचनाओं के संबंध में यात्रियों को आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेने की सलाह दी गयी है. बिना पुष्टि के किसी वीडियो या पोस्ट को आगे साझा करने से भ्रम और अफवाह फैल सकती है.

जांच के बाद स्पष्ट होगी वायरल वीडियो की हकीकत

सीवान साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब पुलिस की तकनीकी जांच पर निगाहें टिकी हैं. प्राथमिकी में उल्लेखित ‘फैयाज क्रिएट्स’ फेसबुक खाते के संचालक की पहचान और वायरल वीडियो के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के लिए पुलिस जांच आगे बढ़ायेगी.

वायरल वीडियो वास्तव में कहां का है, उसे सीवान जंक्शन से जोड़कर क्यों प्रसारित किया गया और इसे कितने लोगों तक पहुंचाया गया, इन सभी बिंदुओं की जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आयेगी.

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