सीवान में मीरा शाह की मजार पर उमड़ा आस्था का सैलाब, अकीदतमंदों ने पढ़ी फातिहा और नहर में दहाए बेड़े

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बड़हरिया के भलुआड़ा स्थित मीरा शाह की मजार पर अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़ी और प्राचीन परंपरा के अनुसार बेड़ा दहवाकर अपनी मन्नतों के लिए दुआ मांगी।

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प्रतिनिधि, बड़हरिया. सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के भलुआड़ा तकिया स्थित मीरा शाह की मजार पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे. लोगों ने मजार पर फातिहा और दारुद पढ़कर अपनी मन्नतों के लिए दुआ मांगी. इस दौरान प्राचीन परंपरा के तहत बेड़ा दहाने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग मजार परिसर पहुंचे.

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मीरा शाह की मजार पर अकीदतमंदों की भीड़

मीरा शाह की मजार पर पहुंचने वाले अकीदतमंदों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक रही. लोगों ने बाबा की मजार पर फातिहा पढ़ी और सुख-शांति व खुशहाली की दुआ मांगी. मजार परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ और धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा.

नहर के पानी में दहाए गए बेड़े

स्थानीय परंपरा के अनुसार, कई अकीदतमंद नावनुमा बेड़ा लेकर मीरा शाह की मजार पर पहुंचे. इसके बाद बेड़ों को नहर के पानी में उल्लास के साथ दहाया गया. इस परंपरा में महिलाओं और बच्चों ने भी उत्साह के साथ हिस्सा लिया.

बेड़ा तैरने को लेकर है खास मान्यता

स्थानीय लोगों के अनुसार, मीरा शाह की मजार पर बेड़ा लेकर पहुंचने और उसे पानी में दहाने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है. अकीदतमंदों की मान्यता है कि जिस व्यक्ति का बेड़ा पानी में आसानी से तैर जाता है, उसकी जिंदगी का बेड़ा भी पार हो जाता है. इसी आस्था के साथ लोग हर साल इस परंपरा को निभाते हैं.

बाबा मीरा शाह की शान में गाए गए गीत

मजार पर फातिहा और दारुद पढ़ने के साथ अकीदतमंदों ने अपनी मन्नतों की पूर्ति के लिए दुआ की. इस दौरान मजावर नजरुद्दीन शाह ने बाबा मीरा शाह की शान में गीत गाए. इससे मजार परिसर में आध्यात्मिक और उत्सवी माहौल बना रहा.

आठ मई को लगता है बाबा मीरा शाह का उर्स

मजावर नजरुद्दीन शाह ने बताया कि हर साल आठ मई को बाबा मीरा शाह की मजार पर उर्स का आयोजन किया जाता है. इसमें बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचते हैं. उर्स के दौरान मजार पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं.

बच्चों में भी दिखा खासा उत्साह

बेड़ा दहाने की परंपरा को लेकर बच्चों में भी काफी उत्सुकता देखने को मिली. बच्चों ने नहर में बेड़ों को तैरते हुए देखा और इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा.

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