सीवान : बखरी में 28 अगस्त से संत सम्मेलन,भीड़ के बीच इन रास्तों पर बदलेगा ट्रैफिक, बाइक की एंट्री होगी बंद
बखरी मठ स्थित मंदिर
Bakhri Saint Conference : सीवान के बखरी में 28 अगस्त से शुरू हो रहे दो दिवसीय संत सम्मेलन की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। दूर-दराज से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे प्रशासन ने यातायात और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
Bakhri Saint Conference : सीवान के सिसवन प्रखंड के बखरी स्थित आनंद बाग में 28 अगस्त से शुरू होने वाले दो दिवसीय संत सम्मेलन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. दूर-दराज से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है. संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने यातायात व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खास तैयारी की है. मठ की ओर आने वाली तीन मुख्य सड़कों पर ड्रॉप गेट लगाए जाएंगे और पीक आवर में बाइक के प्रवेश पर रोक रहेगी.
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श्रद्धालुओं के पहुंचने से बखरी में बढ़ी चहल-पहल
बखरी में संत सम्मेलन की शुरुआत से पहले ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है. आसपास के क्षेत्रों के साथ दूर-दराज से भी लोग आयोजन में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं. आनंद बाग और सुंदर बाग परिसर में संतों के ठहरने, श्रद्धालुओं के बैठने और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
दो दिनों तक होंगे प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम
आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में विभिन्न संत-महात्माओं के प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे. आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है. बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पेयजल, भोजन, बैठने की जगह और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है.

प्रशासनिक बैठक में सुरक्षा और ट्रैफिक पर हुआ मंथन
दो दिवसीय संत मेला की तैयारियों को लेकर बुधवार शाम मठ परिसर में बैठक हुई. मठ के पुजारी राजबल्लभदास की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की समीक्षा की.
अधिकारियों ने भीड़ प्रबंधन को लेकर लिए जरूरी फैसले
बैठक में सीओ उदयन सिंह, बीडीओ राजेश कुमार, सिसवन थानाध्यक्ष चित्तरंजन कुमार और चैनपुर थानाध्यक्ष विजय रंजन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों ने संभावित भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास, वाहनों के नियंत्रण तथा नदी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की.
तीन मुख्य सड़कों पर लगाए जाएंगे ड्रॉप गेट
सीओ उदयन सिंह ने बताया कि मठ की ओर आने वाली तीन मुख्य सड़कों पर ड्रॉप गेट लगाए जाएंगे. इसका उद्देश्य भीड़ के दौरान वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुचारु बनाए रखना है.
पीक आवर में बाइक लेकर पहुंचने पर लगेगी रोक
मेले के पीक आवर में इन मार्गों पर बाइक के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा. प्रशासन का मानना है कि श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच दोपहिया वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने से रास्ते में जाम और दुर्घटना की आशंका कम करने में मदद मिलेगी.
निर्धारित स्थानों पर वाहनों को रोकने की तैयारी
बैठक में जरूरत के अनुसार वाहनों को निर्धारित स्थानों पर रोकने और पार्किंग की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन और आयोजन समिति के निर्देशों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम में शामिल हों.
दाहा नदी पुल के पास रहेगी विशेष सुरक्षा
आयोजन स्थल के आसपास दाहा नदी होने के कारण नदी क्षेत्र को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी. दाहा नदी पुल के समीप सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाएंगे, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे.
जगन्नाथ दास ने रखी थी आनंद बाग मठ की नींव
आनंद बाग मठ का धार्मिक महत्व संत जगन्नाथ दास से जुड़ा है. आनंद बाग में संत जगन्नाथ दास और सुंदर बाग में संत भगवान दास की समाधि के ऊपर भव्य मंदिर बने हैं. श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के लिए मन्नत मांगते हैं.
भगवान दास की गाथा आज भी श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय
जगन्नाथ बाबा के प्रमुख शिष्यों में देवरिया के देवलाल दास, जामो के शुकदेव परमहंस, घोघिया के बलिराम दास, रानीगंज के द्विपाल दास, रामकिशुन दास और बखरी के राजकिशोर दास शामिल रहे. इनमें भगवान दास सर्वाधिक विख्यात हुए. उनकी गाथा आज भी गाई जाती है और उनके शिष्य देश के अलग-अलग हिस्सों में बताए जाते हैं.
आनंद बाग मठ को मिली व्यापक पहचान
जगन्नाथ स्वामी के परलोक गमन के बाद राजकिशोर दास और बाद में भगवान दास मठ के महंत बने. भगवान दास ने आनंद बाग मठ को व्यापक पहचान दिलाई. वर्तमान में राजबल्लभ दास उर्फ जंगली बाबा वर्ष 2001 से मठ के महंत हैं.
दाहा नदी और हरियाली बढ़ाती है मठ की खूबसूरती
आनंद बाग और सुंदर बाग मठ का धार्मिक महत्व होने के साथ प्राकृतिक आकर्षण भी है. दाहा नदी की कल-कल करती धारा और हरे-भरे पेड़ों से घिरा परिसर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. सुबह और शाम अगरु-चंदन तथा धूप की सुगंध से परिसर का वातावरण आध्यात्मिक नजर आता है.
मठों की व्यवस्था को लेकर भी उठते रहे हैं सवाल
स्थानीय जानकारी के अनुसार बखरी स्थित दोनों मठों के लिए किसी समिति या ट्रस्ट का गठन नहीं हुआ है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इनके लिए किसी तरह की ऑडिट व्यवस्था भी नहीं है. आनंद बाग में संत जगन्नाथ स्वामी और सुंदर बाग में संत भगवान दास की समाधि श्रद्धालुओं के प्रमुख आस्था केंद्र हैं.
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