सदर अस्पताल में जीवनरक्षक दवाओं का टोटा: ओपीडी में 104 दवाएं गायब, जेब ढीली करने को मजबूर मरीज
सदर अस्पताल स्थित माडल अस्पताल का फोटो | Prabhat Khabar Network
सीतामढ़ी सदर अस्पताल में 269 में से केवल 165 दवाएं उपलब्ध हैं। मधुमेह और बीपी के मरीजों को बाहर से दवा खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जानें पूरी खबर।
सीतामढ़ी सदर अस्पताल: सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे गरीब और बेबस मरीजों को इन दिनों भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है. सरकारी अस्पताल में मुफ्त दवा की उम्मीद लेकर आ रहे मरीजों को काउंटर से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. ओपीडी सेवा में नियमों के तहत 269 प्रकार की जीवनरक्षक व जरूरी दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए. आठ सितंबर को हुई जांच में इसका खुलासा हुआ कि अस्पताल में महज 165 प्रकार की दवाएं ही मौजूद हैं, जबकि 104 प्रकार की अत्यंत महत्वपूर्ण दवाओं का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है.
बीपी, शुगर और थायराइड के मरीज सबसे ज्यादा बेहाल
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. मनोज कुमार द्वारा की गई जांच में कई गंभीर बीमारियों की दवाओं की अनुपलब्धता सामने आई है:
- इंसुलिन व थायराइड गायब: मधुमेह के मरीजों के लिए अनिवार्य इंसुलिन और थायराइड की दवाओं का स्टॉक शून्य हो चुका है.
- बीपी की दवाएं नदारद: उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए 25 मिलीग्राम की दवा और एम्लोडिपाइन 2.5 मिलीग्राम उपलब्ध नहीं है. 50 मिलीग्राम की दवा उपलब्ध है, जो हर मरीज के परामर्श अनुसार सही नहीं है.
- बच्चों की दवाएं खत्म: बदलते मौसम में बच्चों के लिए नेजल ड्रॉप (सोडियम क्लोराइड), सर्दी की चार मिलीग्राम वाली दवा और तरल कैल्शियम का टोटा है. इसके अलावा जरूरी एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन भी उपलब्ध नहीं है.
निजी मेडिकल स्टोरों पर लुटने को मजबूर मरीज
दवा काउंटर से निराशा हाथ लगने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बाजार का रुख करना पड़ रहा है. शहर के मेहसौल की नगीना खातून, चक महिला के सुमन यादव और बैरगनिया के बेल निवासी अरुण साह समेत दर्जनों मरीजों ने बताया कि अगर सरकारी अस्पताल आकर भी बाहर से दवा खरीदनी पड़े, तो उनका पूरा बजट बिगड़ जाता है. मरीजों और तीमारदारों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में तुरंत सभी 104 दवाओं की खेप मंगाने की पुरजोर मांग की है.
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