किसान मित्रों को दिया गया आधुनिक कृषि एवं जैविक खेती का प्रशिक्षण, 50 किसानों को मिला किट

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किसानों के बीच किट का वितरण करते वैज्ञानिक व उपस्थित अन्य. | Prabhat Khabar Network

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सीतामढ़ी में कृषि विज्ञान केंद्र और इफको ने किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सह कृषि उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया. इसमें किसानों को आधुनिक खेती, जैव उर्वरकों के उपयोग और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के तरीकों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई. कार्यक्रम के अंत में 50 किसान मित्रों के बीच कृषि किट का वितरण किया गया.

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Sitamarhi News: कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बलहा मकसूदन, सीतामढ़ी एवं इफको के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को प्रशिक्षण सह कृषि उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक खेती, जैव उर्वरकों के उपयोग और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी गई. अंत में 50 किसान मित्रों के बीच कृषि किट का वितरण किया गया.

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मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर दिया गया जोर

कार्यक्रम का उद्घाटन इफको के मुख्य प्रबंधक डॉ. रमेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक कुणाल कुमार तथा केवीके के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने दीप प्रज्वलित कर किया.

मुख्य अतिथि डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि सीतामढ़ी सहित देश के अधिकांश जिलों में कृषि योग्य भूमि में पोषक तत्वों और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है तथा खेती की लागत बढ़ रही है. उन्होंने किसानों को राइजोबियम कल्चर, कंसोर्टिया और सागरिका जैसे जैव उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभ की जानकारी दी.

जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती अपनाने की सलाह

केवीके के प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए खेती की पद्धति में बदलाव आवश्यक है. उन्होंने जैव, कार्बनिक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर कम से कम दो प्रतिशत तक बढ़ाने पर जोर दिया. इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार होगा.

नैनो उर्वरकों की दी जानकारी

इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक कुणाल कुमार ने किसानों को नैनो डीएपी प्लस, नैनो यूरिया, नैनो जिंक, नैनो कॉपर, जल विलेय उर्वरक और इफको जैव अपघटक जैसे आधुनिक उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इनके प्रयोग से उर्वरकों की लागत घटेगी और फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी.

प्रभारी डॉ. किंकर कुमार ने बताया कि पशुपालन और गोबर से तैयार केंचुआ खाद मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है. वहीं उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और जलवायु अनुकूल सब्जियों की किस्मों पर जानकारी दी. सस्य वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद ने फसल चक्र में दलहनी फसलों को शामिल करने की सलाह दी.

इफको के कृषि स्नातक प्रशिक्षु निलांचल निशान ने इफको के विभिन्न उत्पादों की विस्तृत जानकारी दी.

50 किसान मित्रों को मिला कृषि किट

कार्यक्रम के अंत में 50 किसान मित्रों को कृषि किट वितरित किए गए. इस अवसर पर मुकेश कुमार, श्याम बिहारी राय सहित कई किसान एवं कृषि विशेषज्ञ मौजूद थे.

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