बाल श्रम उन्मूलन को बड़ी सफलता: रुन्नीसैदपुर की महिसार पंचायत आधिकारिक रूप से घोषित हुई बाल श्रम मुक्त

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बाल श्रम उन्मूलन को लेकर जागरूकता अभियान में शामिल महिलाएं व अन्य. | Prabhat Khabar Network

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सीतामढ़ी जिले की महिसार पंचायत को आधिकारिक तौर पर बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया है। ग्रामीणों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।

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बाल श्रम मुक्ति: सीतामढ़ी जिले में बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों को ऐतिहासिक सफलता मिली है. सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर प्रखंड अंतर्गत महिसार पंचायत को गुरुवार को औपचारिक रूप से 'बाल श्रम मुक्त पंचायत' घोषित किया गया. श्रम संसाधन विभाग, ग्राम पंचायत और सामाजिक संस्थाओं के साझा अभियान के बाद आयोजित विशेष आम सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया.

संयुक्त जागरूकता अभियान से मिली उपलब्धि

श्रम संसाधन विभाग के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी पंकज कुमार के नेतृत्व में इस पंचायत का चयन विशेष पहल के तहत किया गया था. इसके बाद पंचायत को बाल श्रम के दंश से मुक्त कराने के लिए सघन अभियान चलाया गया. इस सफलता में निम्नलिखित प्रमुख हितधारकों की अहम भूमिका रही:

  • श्रम संसाधन विभाग का धावा दल: नियमित निरीक्षण और सत्यापन कार्य.
  • ग्राम पंचायत प्रशासन: स्थानीय स्तर पर समन्वय और जागरूकता.
  • पंचायत स्तरीय बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति: बच्चों की स्थिति पर सतत निगरानी.
  • अदिथी कवच परियोजना: जमीनी स्तर पर परिवारों की काउंसलिंग और सहयोग.
  • ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता: बाल अधिकारों की रक्षा में सामूहिक सहयोग.

विशेष आम सभा में सर्वसम्मति से घोषणा

मुखिया सह ग्राम पंचायत अध्यक्ष रामलखन राय की अध्यक्षता में आयोजित विशेष आम सभा में पूरी पंचायत को बाल श्रम से मुक्त घोषित करने का प्रस्ताव पारित हुआ. इस मौके पर पंचायत में भविष्य में भी बाल श्रम की कुप्रथा को पूरी तरह रोकने के लिए 10 सदस्यीय विशेष निगरानी समिति का विधिवत गठन किया गया. यह समिति गांव के हर बच्चे के स्कूल नामांकन और उपस्थिति पर नजर रखेगी.

शिक्षा और सुरक्षा के संकल्प के साथ सभा संपन्न

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कन्वर्जेंस विशेषज्ञ मुकुंद कुमार चौधरी ने कहा कि बाल श्रम दया नहीं, बल्कि सीधा शोषण है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हर बच्चे के शिक्षा और सुरक्षा के अधिकारों की रक्षा करना पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी है. सभा के अंत में उपस्थित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने हर बच्चे को अनिवार्य शिक्षा और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराने का सामूहिक संकल्प लिया.

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