जलवायु परिवर्तन पर सरकार तथा समाज गंभीर हो

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जलवायु परिवर्तन तथा नदी विमर्श मंच के तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दुनिया के सबसे ज्वलंत सवाल ”जलवायु परिवर्तन और उससे उपजे विभिन्न संकट” तथा संपूर्ण क्रांति दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया.

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सीतामढ़ी. जलवायु परिवर्तन तथा नदी विमर्श मंच के तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दुनिया के सबसे ज्वलंत सवाल ””””जलवायु परिवर्तन और उससे उपजे विभिन्न संकट”””” तथा संपूर्ण क्रांति दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता डॉ आनंद किशोर ने की. विषय प्रवेश कराते उन्होंने विस्तार से जलवायु परिवर्तन से व्याप्त वैश्विक संकट पर चर्चा की तथा वृक्षारोपण, सीओटू उत्सर्जन में कमी लाने तथा पानी बचाने को अपने जीवन में उतारने तथा दूसरों को प्रेरित करने पर बल दिया. दिनेश चंद्र द्विवेदी ने प्लास्टिक के उपयोग पर रोक पर अमल की जरूरत बतायी. पूर्व पंसस अमरेंद्र राय ने सरकारी जमीन पर वृक्षारोपण की बात कही. प्रमोद नील ने नल जल के पानी की बर्बादी पर रोक की जरूरत बतायी और सड़कों के किनारे वृक्षारोपण पर जोर दिया. शिक्षक नेता विजय शुक्ला ने सुधा द्वारा प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने की बात की. रामप्रमोद मिश्र ने पर्यावरण संकट से निपटने के लिए सरकार समाज को आगे आने की चर्चा की. शशिधर शर्मा ने पर्यावरण सुरक्षा के लिये विलासिता की सामग्री पर नियंत्रण की जरूरत बतायी. पूर्व प्राचार्य ब्रजमोहन मंडल ने व्यापक जागरण अभियान चलाने को आवश्यक बताया. संपूर्ण क्रांति दिवस पर वक्ताओं ने कहा कि देश को संपूर्ण क्रांति की जरुरत है. संस्थाएं कमजोर हो रही हैं. इस मौके पर किसान नेता जलंधर यदुवंशी, सुरेश बैठा, नंदकिशोर मंडल, अवधेश यादव, मो गयासुद्दीन, मदन मोहन ठाकुर, अशोक कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, अशोक निराला, रामबीर समेत अन्य मौजूद रहे.

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