कर्मी काम किये तो पोता जायेगा कालिख

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कर्मी काम किये तो पोता जायेगा कालिख — 120 वें दिन भी मधेशियों का आंदोलन जारी — शहर में जगह-जगह हुआ प्रदर्शन बैरगनिया : सीमा पार नेपाल के गौर शहर में रविवार को 120 वें दिन भी मधेशियों का आंदोलन जारी रहा. हजमिनिया व पताहीं गांव से गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला गया. इसमें हजारों […]

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कर्मी काम किये तो पोता जायेगा कालिख — 120 वें दिन भी मधेशियों का आंदोलन जारी — शहर में जगह-जगह हुआ प्रदर्शन बैरगनिया : सीमा पार नेपाल के गौर शहर में रविवार को 120 वें दिन भी मधेशियों का आंदोलन जारी रहा. हजमिनिया व पताहीं गांव से गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला गया. इसमें हजारों लोग शामिल हुए. इधर, संघीय समावेशी मधेशी गंठबंधन एवं संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोरचा की ओर से गौर के मधेश क्रांति चौक से बॉर्डर तक जुलूस निकाला गया. इसका नेतृत्व मधेशी नेता अनिल कुमार सिंह, शेख जमशैद, राम प्रताप सिंह व शैलेंद्र सिंह ने किया. — मधेश का शमन बंद करोजुलूस के दौरान लोग पीएम केपी ओली के मुरदावाद के नारे लगा रहे थे. मधेश का शमन बंद करो, के भी नारे लगाये जा रहे थे. बाद में उक्त नेताओं के साथ हीं धर्मेंद्र पटेल व ललित यादव ने गौर के सरकारी कार्यालयों में जाकर अधिकारी व कर्मियों को चेतावनी दी कि आंदोलन के दौरान कार्यालय में काम न करें. अन्यथा चेहरे पर कालिख पोत दिया जायेगा. बॉर्डर पर नाकेबंदी व धरना जारी रहा. — सरकार की मंशा ठीक नहीं संघीय समावेशी मधेशी गंठबंधन की ओर से महोतरी के जलेश्वर में विशाल सभा का आयोजन किया गया. मौके पर पार्टी नेता शरत सिंह भंडारी, अनिल कुमार झा, राजकिशोर यादव व जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी समूह व दल से नहीं, बल्कि नेपाल से संवैधानिक अधिकार के लिए है. मांगों को संविधान में शामिल न कर लिया जाता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा. नेताओं ने कहा कि चार माह से आंदोलन चल रहा है. बावजूद सरकार खामोश है और उसे लाखों मधेशियों के भविष्य की चिंता नहीं है. इससे स्पष्ट है कि सरकार मधेश के लोगों से भेदभाव कर रही है. यह आंदोलन शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में की जा रही है. क्षेत्र की जनता की पीड़ा सहन नहीं की जा सकती.

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