शिवहर मंडल कारा में 35 बंदियों को बकरी पालन की ट्रेनिंग, रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने की पहल

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प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसडीएम डॉ अनंत कुमार, जेल अधीक्षक राकेश कुमार एवं अन्य

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शिवहर मंडल कारा में बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक अनूठी पहल शुरू हुई है. 35 कैदियों को 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें.

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Sheohar News: शिवहर. मंडल कारा शिवहर में बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है. बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान यानी आरसेटी की ओर से आयोजित प्रशिक्षण का शुभारंभ एसडीएम डॉ. अनंत कुमार, जेल अधीक्षक राकेश कुमार, एलडीएम अमरेश कुमार और आरसेटी निदेशक पवन कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. प्रशिक्षण में 35 बंदी शामिल हैं.

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35 बंदियों को दी जा रही बकरी पालन की ट्रेनिंग

प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत मंडल कारा के 35 बंदियों को बकरी पालन से जुड़ी व्यावहारिक और तकनीकी जानकारी दी जाएगी. अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य बंदियों को ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिसे वे जेल से बाहर आने के बाद रोजगार और स्वरोजगार के रूप में अपना सकें.

प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.

कम लागत में शुरू हो सकता है बकरी पालन : एसडीएम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसडीएम डॉ. अनंत कुमार ने बकरी पालन के महत्व और इससे होने वाले आर्थिक लाभों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बकरी पालन अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकने वाला उपयोगी स्वरोजगार है.

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर बंदी रिहाई के बाद अपने जीवन को बेहतर दिशा देने के लिए इस व्यवसाय को अपना सकते हैं. इससे उन्हें सम्मानजनक तरीके से आजीविका शुरू करने में मदद मिल सकती है.

बैंक लोन और उद्यमिता की भी मिलेगी जानकारी

आरसेटी के निदेशक पवन कुमार ने बताया कि संस्थान ग्रामीण बेरोजगार और इच्छुक लोगों को विभिन्न स्वरोजगार एवं कौशल आधारित गतिविधियों में निःशुल्क प्रशिक्षण देता है. प्रशिक्षण के साथ प्रतिभागियों को स्वरोजगार शुरू करने, बैंक ऋण लेने और उद्यमिता से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जाती है.

इसी उद्देश्य के तहत मंडल कारा में बंदियों को बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन की तैयारी

आरसेटी निदेशक ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल बकरी पालन सिखाना नहीं, बल्कि बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी है. कौशल सीखने के बाद वे स्वरोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे.

इस तरह का प्रशिक्षण बंदियों में सकारात्मक सोच और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद कर सकता है.

नस्ल से लेकर स्वास्थ्य देखभाल तक सिखाया जाएगा

12 दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को बकरी पालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी. इसमें बकरियों की नस्ल का चयन, आवास व्यवस्था, खान-पान, स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण और प्रजनन से संबंधित जानकारी शामिल होगी.

इसके साथ ही बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में संचालित करने और व्यवसाय प्रबंधन के जरूरी पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा.

कौशल प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और प्रशिक्षकों ने कहा कि बंदियों को कौशल आधारित प्रशिक्षण देने से उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और स्वरोजगार की भावना विकसित होगी. इससे समाज में दोबारा जुड़ने और सम्मानजनक जीवन जीने की राह आसान हो सकती है.

कार्यक्रम में आरसेटी फैकल्टी निकेत कुमार और गेस्ट फैकल्टी रवि रंजन झा समेत अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे.

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