रोहतास: करगहर को नगर पंचायत का दर्जा मिलने की उम्मीद बढ़ी, परिसीमन का काम एक सप्ताह में हो सकता है पूरा

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करगहर में बसावट की तस्वीर

करगहर को नगर पंचायत का दर्जा मिलने की उम्मीदें प्रबल हो गई हैं, क्योंकि परिसीमन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. गांव से लेकर शहर तक इस बात की चर्चा है कि कौन से इलाके इसमें शामिल होंगे. इससे क्षेत्र में विकास की नई लहर आने की आस जगी है.

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Rohtas Panchayat Delimitation: करगहर विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद प्रखंड में पंचायत चुनाव के परिसीमन को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. गांव से लेकर चौक-चौराहों और गली-मोहल्लों तक इस बात की चर्चा है कि कौन-कौन से वार्ड नगर पंचायत क्षेत्र में शामिल होंगे और कौन से इलाके पंचायत क्षेत्र में रहेंगे. इसी बीच करगहर को नगर पंचायत का दर्जा मिलने की संभावना भी प्रबल होती दिख रही है.

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हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक करगहर को नगर पंचायत बनाने को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. वहीं, प्रखंड कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार करीब एक सप्ताह के भीतर परिसीमन का कार्य पूरा कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपने की तैयारी है.

बीडीओ ले रहे पंचायत प्रतिनिधियों से फीडबैक

परिसीमन को लेकर बीडीओ अजित कुमार सक्रिय हैं. वे पिछले दो दिनों से वर्तमान और पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क कर क्षेत्र की स्थिति को लेकर फीडबैक ले रहे हैं. इसके अलावा राजस्व कर्मचारी, अंचल कर्मी और संबंधित पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है. बीडीओ अजित कुमार ने बताया कि परिसीमन को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है. वरीय अधिकारियों से आदेश प्राप्त होते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.

क्या होता है परिसीमन

आबादी और क्षेत्र की स्थिति के अनुरूप पंचायतों का परिसीमन किया जाता है. नगर और पंचायत परिसीमन के लिए अलग-अलग प्रावधान होते हैं. नगर परिसीमन में आबादी के साथ राजस्व गांवों को भी ध्यान में रखा जाता है, जबकि पंचायत परिसीमन मुख्य रूप से आबादी के आधार पर किया जाता है.

प्रखंड कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 12 हजार से अधिक आबादी या 75 प्रतिशत से ज्यादा गैर कृषि भूमि होने जैसी स्थितियों में पंचायत को नगर क्षेत्र में उत्क्रमित करने के प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाता है. इसके अलावा अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर भी परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाती है.

इन गांवों को नगर पंचायत में शामिल किए जाने की चर्चा

करगहर को नगर पंचायत बनाए जाने की स्थिति में मुख्यालय से सटे सेमरी, सहुआड, लखनपुर, सिरिसियां और निमडिहरा गांव को नगर क्षेत्र में शामिल किए जाने की चर्चा है. इन गांवों की दूरी करगहर मुख्यालय से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर के दायरे में बतायी जा रही है.

करगहर पंचायत में कुल 14 वार्ड हैं. इनमें 12 वार्ड करगहर गांव और दो वार्ड निमडिहरा में हैं. प्रखंड मुख्यालय होने के कारण करगहर की कुल आबादी करीब 10 हजार बतायी जा रही है. वहीं सेमरी में चार, लखनपुरा में एक, सिरिसियां में तीन, सहुआड में तीन और निमडिहरा में दो वार्ड हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के गांवों को करगहर के साथ जोड़ने पर नगर पंचायत के लिए जरूरी आबादी संबंधी मानकों को पूरा करने की संभावना बन सकती है.

नगर पंचायत बनने से विकास की उम्मीद

करगहर को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से उठती रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत बनने से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को गति मिल सकती है. बस स्टैंड, सब्जी मंडी, खेल मैदान और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास की उम्मीद भी लोगों ने जताई है.

पैक्स अध्यक्ष विमल उपाध्याय ने कहा कि करगहर को काफी पहले नगर पंचायत का दर्जा मिल जाना चाहिए था. उनके अनुसार कुछ जनप्रतिनिधियों के निजी स्वार्थ के कारण यह मामला आगे नहीं बढ़ सका. पूर्व विधायक संतोष कुमार मिश्र ने भी विधानसभा में करगहर को नगर पंचायत बनाने की मांग उठाई थी.

समाजसेवी हरिगोबिंद पांडेय उर्फ गोलू पांडेय ने कहा कि करगहर पुराना बाजार है और नगर पंचायत बनने की कई अहर्ताएं पूरी करता है. उन्होंने इस बार करगहर को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांग की.

लोगों ने बताया, विकास के लिए जरूरी है नगर पंचायत का दर्जा

सेमरी के मोहम्मद आरिफ इस्लाम ने कहा कि करगहर को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिलने से क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है. उन्होंने जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों से इस दिशा में पहल करने की अपील की.

समाजसेवी दीपक रंजन वर्मा ने कहा कि करगहर में बिजली बिल और जमीन रजिस्ट्री की फीस शहरी क्षेत्र के हिसाब से लगती है. इसके बावजूद करगहर को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिलना समझ से परे है.

निमडिहरा के समाजसेवी बच्चा सिंह यादव ने कहा कि करगहर के विकास के लिए नगर पंचायत बनना जरूरी है. उनके अनुसार पंचायती राज व्यवस्था में खर्च के अनुपात में क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो पाया है.

करगहर निवासी राकेश पांडेय ने कहा कि वर्ष 2014 में तत्कालीन बीईओ द्वारा राजनीतिक दबाव में सही रिपोर्ट नहीं दिए जाने के कारण करगहर नगर पंचायत का दर्जा हासिल नहीं कर सका. उन्होंने कहा कि नगर पंचायत बनने से क्षेत्र में बस स्टैंड, सब्जी मंडी, खेल मैदान समेत कई बुनियादी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है.

परिसीमन के बाद तस्वीर होगी साफ

फिलहाल करगहर को नगर पंचायत में शामिल किए जाने की संभावना को लेकर लोगों में उत्सुकता है. हालांकि अंतिम स्थिति परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी. अधिकारियों द्वारा क्षेत्र की आबादी, गांवों की स्थिति और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसके बाद यह तय होगा कि कौन से क्षेत्र नगर पंचायत में शामिल होंगे और कौन से पंचायत क्षेत्र में रहेंगे.

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