उसरी ब्रह्मस्थान पर क्यों होती है विशेष पूजा, 72 साल पहले क्या हुआ था, जानिए पूरी कहानी
उसरी ब्रह्मस्थान पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु पूजा कमिटी के सदस्य व तरैया प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि धनवीर कुमार सिंह विक्कू | Prabhat Khabar Network
जानें उसरी ब्रह्मस्थान पर होने वाली विशेष पूजा की अनोखी परंपरा का रहस्य. 72 साल पहले घटी एक हृदयविदारक घटना ने इस स्थान को कैसे महत्व दिया, यह कहानी आपको बताएगी.
Usri Brahmsthan Saran : तरैया प्रखंड के उसरी बाजार के समीप स्थित उसरी ब्रह्मस्थान पर ब्रह्म बाबा, गांगोंदाई व बालक बाबा की पूजा शुक्रवार को पूरे धूमधाम के साथ पूरा हुआ. नारायणपुर पंचायत के सभी गांवों के सभी वर्गो के श्रद्धालु नाग पंचमी के बाद पड़ने वाले शुक्रवार या सोमवार को उसरी ब्रह्मस्थान पर पहूंचकर ब्रह्म बाबा, गांगोंदाई व बालक बाबा की पूजा करते हैं. उक्त ब्रह्म स्थान पर अब आसपास के गांवों के श्रद्धालु भी पूजा अर्चना करना शुरू कर दिये हैं.
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सुबह से श्रद्धालु भक्त ब्रह्मस्थान पर दूध चावल का खीर भोजन बनाकर चढ़ाते हैं तथा दूध का उधियावन करते हैं. यह रस्म उनकी गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता का प्रतीक है. यह माना जाता है कि इस प्रसाद से बाबा प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यह खीर और उधियावन प्रेम और समर्पण का भाव व्यक्त करता है. नारायणपुर के श्रद्धालु ग्रामीणों की ब्रह्मस्थान परिसर में सुबह से ही जुटा होने लगा था. नारायणपुर से टोटो, टेम्पू,अपनी निजी सवारी गाड़ियों से श्रद्धालु पहुंच रहे थे. एक दिन की पूजा अर्चना को लेकर भव्य मेला भी लगता है. जहां सैकड़ों की संख्या में दुकानें लगती हैं तथा खेल तमाशा वाले पहुंचते हैं.

उसरी ब्रह्मस्थान पर पूजा अर्चना की लंबी है कहानी
करीब 72 साल पहले की बात है, जब नारायणपुर गांव के एक ब्राह्मण जगदीश बाबा अपनी पत्नी गांगोंदाई के साथ अपने ससुराल से लौट रहे थे कि भरी दुपहरी में दोनों पति - पत्नी उसरी ब्रह्मस्थान की छांव में आराम करने के लिए रुके. आराम करने के दौरान ब्राह्मण जगदीश बाबा को सांप ने डंस लिया. सर्पदंश के कारण जब उनकी स्थिति बिगड़ने लगी तो उन्होंने कहा कि मेरी मृत्यु के बाद यही पर मेरी अंतिम संस्कार कर देना. उनकी पत्नी यह बात सुनकर काफी बेचैन हो गयी. उनकी पत्नी के गर्भ में एक बच्चा पल रहा था.
सर्पदंश से ब्राह्मण जगदीश बाबा की मौत हो गयी. जब उनकी चिता जल रहा था तो उसी चिता पर उनकी पत्नी गांगोंदाई अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के साथ जलकर भष्म हो गयी. यह घटना लगभग 72 वर्षो पहले की बताई जाती है. ब्रिटिशकाल की समय की घटना है. उसके बाद से नारायणपुर गांव के ब्राह्मण समाज के श्रद्धालु भक्तों ने नाग पंचमी के बाद पड़ने वाले पहले शुक्रवार या सोमवार को उसरी जाकर ब्रह्मस्थान पर जगदीश बाबा, गांगों देवी व उनके गर्भ में पल रहे बालक बाबा की पूजा अर्चना शुरू की गयी.
पूजा प्रारम्भ होने के साल दो साल के बाद धीरे-धीरे पूरे नारायणपुर के सभी परिवार के लोगों ने पूजा अर्चना करना प्रारम्भ कर दिये. नारायणपुर गांव निवासी व आचार्य बच्चा तिवारी , विमल तिवारी, पूर्व बीडीसी नागेन्द्र प्रसाद ने संयुक्त रूप से बताया कि नारायणपुर गांव के सभी लोग बाबा की सच्चे मन से पूजा अर्चना करने जाते हैं. उक्त स्थल पर काफी धूमधाम से पूजा होती है. ब्रह्मस्थान के आसपास पुरे दिन मेला लगता है.

मंदिर बनाने में इन लोगों का है योगदान
तरैया प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि धनवीर कुमार सिंह विक्कू के द्वारा ब्रह्मस्थान के भव्य चबूतरे का निर्माण कराया गया है. प्रमुख प्रतिनिधि धनवीर कुमार सिंह विक्कू, बीडीसी विश्वकर्मा शर्मा, देवेन्द्रनाथ दिनकर, लालबहादुर राय, द्वारिका महतो, धर्मेन्द्र राय, अखिलेश महतो, सरोज शर्मा, रंजन प्रसाद, सुशील ठाकुर, श्याम नारायण महतो, मनोज साह, राहुल ठाकुर समेत पूजा समिति के अन्य सदस्यों ने पूजा अर्चना कर नारायणपुर गांव से पूजा अर्चना करने पहुंचे श्रद्धालुओं को अंगवस्त्र से सम्मानित किये गये.
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