सारण में नेपाल की बाढ़ का नहीं पड़ा खास असर, नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर, चूड़ा, गुड़, चना और टेंट रखने का निर्देश
सारण के प्रमंडलीय आयुक्त ने किया गंडक तटीय इलाकों का निरीक्षण
नेपाल में आई बाढ़ का सारण जिले पर फिलहाल कोई खास असर नहीं है. नदियों के जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन 24 घंटे निगरानी रख रहा है. राहत और बचाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
Nepal Flood Effect on Saran: नेपाल में आयी बाढ़ के बीच सारण जिले में फिलहाल स्थिति सामान्य बनी हुई है. जिले की नदियों के जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है. अधिकारियों के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर में एक से दो सेंटीमीटर का अंतर सामान्य है और फिलहाल जिले में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है. वाल्मीकि बराज से गुरुवार को करीब 1.06 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, लेकिन इसका सारण में गंडक के जलस्तर पर कोई खास असर नहीं पड़ा.
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जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सभी संबंधित अधिकारियों को नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे नजर रखने का निर्देश दिया है. साथ ही किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव की तैयारियों को पूरी तरह दुरुस्त रखने को कहा गया है. जिले में महाजाल समेत आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गयी है.
गंडक तटीय इलाकों का आयुक्त ने किया निरीक्षण
गुरुवार को सारण प्रमंडल के आयुक्त मनीष कुमार ने गंडक नदी के तटीय इलाकों का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जलस्तर और तैयारियों की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. जिला प्रशासन की ओर से सभी अंचल अधिकारियों को जरूरत के अनुसार जेनरेटर सेट, टेंट, खाली सीमेंट की बोरियां और महाजाल पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने को कहा गया है.
बाढ़ की स्थिति में दवाओं का पर्याप्त भंडारण
बाढ़ के दौरान और उसके बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट किया गया है. असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, रेफरल अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
अस्पतालों में सर्पदंश की दवा, एंटी-रेबिज वैक्सीन, क्लोरीन टैबलेट, हैलोजन टैबलेट, ओआरएस, ब्लीचिंग पाउडर समेत अन्य जरूरी मानव दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने को कहा गया है.
पशुओं के लिए दवा और चारे की भी व्यवस्था
बाढ़ की स्थिति में पशुओं को होने वाली परेशानी को देखते हुए पशुपालन विभाग को भी आवश्यक तैयारी रखने का निर्देश दिया गया है. जिला पशुपालन पदाधिकारी को शरणस्थलों से संबद्ध पशु शिविरों की व्यवस्था करने और पशु चिकित्सालयों व शिविरों में पर्याप्त पशु दवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया है. इसके अलावा पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है.
चूड़ा, गुड़, चना और टेंट रखने का निर्देश
आपदा प्रबंधन शाखा को किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है. राहत सामग्री के रूप में चना, चूड़ा, गुड़, पॉलीथीन शीट और टेंट की पर्याप्त व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है. प्रशासन का जोर इस बात पर है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री तत्काल पहुंचायी जा सके.
पंचायतों की भी तय की गयी जिम्मेदारी
प्राकृतिक आपदा या बाढ़ की स्थिति में त्रिस्तरीय पंचायतों की भूमिका भी तय की गयी है. प्रभावित लोगों के बीच राहत वितरण की निगरानी पंचायत स्तरीय राहत, निगरानी एवं अनुश्रवण समिति करेगी. राहत सामग्री के वितरण से संबंधित जानकारी प्रखंड और पंचायत के सूचना पट पर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है.
फसल क्षति की स्थिति में तैयार होगी आकस्मिक योजना
बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान होने की स्थिति में कृषि विभाग को भी तैयारी रखने को कहा गया है. जिला कृषि पदाधिकारी को बाढ़ प्रभावित प्रखंडों के लिए आकस्मिक फसल योजना और वैकल्पिक फसल योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है. इन योजनाओं का किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार भी कराया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर किसान वैकल्पिक फसल की ओर रुख कर सकें.
सारण की नदियों का वर्तमान जलस्तर
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार जिले की प्रमुख नदियों में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है.
| नदी | खतरे का निशान | वर्तमान जलस्तर | बुधवार के मुकाबले |
| गंगा (गांधी घाट) | 48.60 मीटर | 49.35 मीटर | 6 सेमी कमी |
| गंडक (हाजीपुर) | 50.32 मीटर | 49.43 मीटर | 4 सेमी कमी |
| गंडक (रेवा) | 54.41 मीटर | 53.29 मीटर | 18 सेमी कमी |
| सरयू/घाघरा (सिसवन) | 57.04 मीटर | 56.38 मीटर | 11 सेमी कमी |
| घाघरा (छपरा) | 53.68 मीटर | 51.73 मीटर | 1 सेमी वृद्धि |
रिपोर्ट के अनुसार घाघरा नदी के छपरा में जलस्तर में बुधवार की तुलना में एक सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है. वहीं सिसवन में 11 सेंटीमीटर, गंडक हाजीपुर में चार सेंटीमीटर, गंडक रेवा में 18 सेंटीमीटर और गंगा गांधी घाट पर छह सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी है.
वाल्मीकि बराज से छोड़े गये पानी का नहीं पड़ा खास असर
बाढ़ प्रमंडल के अधिकारियों के अनुसार गुरुवार को दोपहर तीन बजे वाल्मीकि नगर स्थित गंडक बराज से करीब 1.06 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इसके बावजूद सारण में गंडक नदी के जलस्तर में केवल मामूली अंतर दर्ज किया गया. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है.
क्या होता है क्यूसेक?
क्यूसेक पानी के प्रवाह को मापने की इकाई है. इसका पूरा अर्थ क्यूबिक फीट प्रति सेकंड होता है. एक क्यूसेक करीब 28.317 लीटर पानी प्रति सेकंड के प्रवाह के बराबर होता है.
अधिकारी बोले- सारण में डरने की जरूरत नहीं
बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने कहा कि जिस तरह की भयावह स्थिति की बात कही जा रही थी, सारण में फिलहाल वैसी स्थिति नहीं है. उन्होंने बताया कि जिले में पहुंचते-पहुंचते पानी का वेग कम हो जाता है और कई नदियों व वितरिकाओं में पानी फैल जाता है. गंडक नदी के जलस्तर में भी केवल एक-दो सेंटीमीटर का अंतर आया है.
उन्होंने कहा कि वाल्मीकि बराज से 1.06 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो सामान्य स्थिति में है. फिलहाल कहीं भी घबराने जैसी स्थिति नहीं है. हालांकि, प्रशासन ने किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी है.
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