सारण : रसूलपुर में पांच दिन तक गूंजा राधे-कृष्ण का जयकारा, झूलनोत्सव ने दिया समरसता का संदेश
राधा-कृष्ण को झुलाते श्रद्धालु
Rasulpur Jhulnotsav : रसूलपुर में पांच दिवसीय श्रीकृष्ण झूलनोत्सव का भक्तिपूर्ण समापन हुआ, जिसमें राधा-कृष्ण की झांकी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. यह उत्सव सौ साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है जो सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है.
Rasulpur Jhulnotsav : सारण के रसूलपुर स्थित बाबा दुर्गेश्वरनाथ शिवमंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण झूलनोत्सव शुक्रवार की रात भक्तिभाव के साथ संपन्न हो गया. अंतिम दिन राधा-कृष्ण की झांकी और झूले के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहा. ग्रामीणों ने बारी-बारी से राधा-कृष्ण को झुलाया और भक्ति में डूबे नजर आए. आजमगढ़ से पहुंची झांकी टीम के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया.
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पांच दिनों तक भक्ति में डूबा रहा रसूलपुर
रसूलपुर के बाबा दुर्गेश्वरनाथ शिवमंदिर परिसर में पांच दिनों तक श्रीकृष्ण झूलनोत्सव का आयोजन हुआ. शुक्रवार की रात धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ उत्सव का समापन हुआ. पूरे आयोजन के दौरान गांव में भक्तिमय माहौल बना रहा.
राधा-कृष्ण को झुलाने के लिए उमड़ा उत्साह
समापन के दिन झूले में विराजमान राधा-कृष्ण की मूर्तियों को झुलाने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखा. ग्रामीणों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान राधा-कृष्ण को झुलाया. मंदिर परिसर में इस दौरान श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही.
आजमगढ़ की टीम ने पेश की झांकी
उत्सव के अंतिम दिन आजमगढ़ से पहुंची झांकी टीम के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. कलाकारों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया और कार्यक्रम में उत्साह बढ़ाया. धार्मिक माहौल के बीच लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया.
पुआ का प्रसाद बांटा गया
झूलनोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच पुआ का प्रसाद वितरित किया गया. प्रसाद ग्रहण करने के लिए भी लोगों में उत्साह रहा. धार्मिक आयोजन में शामिल ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया.
ग्रामीणों की भागीदारी से सफल हुआ आयोजन
झूलनोत्सव के आयोजन में ग्रामीणों ने आर्थिक और सामाजिक रूप से सहयोग किया. आयोजन को सफल बनाने में गांव के लोगों की सामूहिक भागीदारी रही. यही सामूहिक सहभागिता इस उत्सव की खास पहचान बनी रही.
पांचों दिन विधिवत हुई पूजा-अर्चना
मंदिर के पुजारी खीरू बाबा के नेतृत्व में पांचों दिन विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण की आराधना की और झूले में विराजमान भगवान को भक्ति भाव से झुलाया.
सौ साल पुरानी है झूलनोत्सव की परंपरा
ग्रामीण और चिकित्सक डॉ डीके ओझा ने बताया कि रसूलपुर में करीब सौ वर्षों से झूलनोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है. उनके अनुसार यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि गांव के लोगों को एक साथ जोड़ने का भी माध्यम है.
उत्सव से बढ़ती है सामाजिक समरसता
डॉ डीके ओझा ने कहा कि झूलनोत्सव ग्रामीणों को एक मंच पर लाता है. सभी वर्गों के लोग आयोजन में सहयोग करते हैं और उत्सव में भाग लेते हैं. इससे गांव में आपसी मेल-जोल और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है.
समापन में कई लोग रहे मौजूद
समापन समारोह में मुखिया प्रतिनिधि मिथिलेश प्रसाद, उपमुखिया मनोज सोनी नन्हे, अनूप कुमार दूबे, विशु श्रीवास्तव, अशोक दुबे, बल्टू दुबे आर्मी, पिंटू श्रीवास्तव, मंजीत मिश्रा, शुभम दुबे, अमन दुबे, प्रिंस सोनी, अंशु चौरसिया, लालू सोनी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे.
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