सारण : जेपीयू के 28 नए डिग्री कॉलेजों में क्यों खाली हैं 90% से ज्यादा सीटें, सामने आई बड़ी वजह

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जेपीयू का प्रशासनिक भवन

JPU New Degree Colleges : जयप्रकाश विश्वविद्यालय के छपरा, सीवान और गोपालगंज के 28 नए डिग्री कॉलेजों में स्नातक सत्र 2026-30 के लिए 90% से अधिक सीटें खाली हैं. अर्थशास्त्र, अंग्रेजी जैसे विषयों में बेहद कम रुचि देखी गई है. जानिए इस गंभीर स्थिति के पीछे की वजहें और स्पॉट एडमिशन की स्थिति.

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JPU New Degree Colleges : छपरा, सीवान और गोपालगंज में हाल ही में शुरू हुए जयप्रकाश विश्वविद्यालय के 28 नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में स्नातक सत्र 2026-30 के दाखिले की तस्वीर फिलहाल चिंताजनक है. पहली, दूसरी और तीसरी मेधा सूची के बाद भी अधिकतर कॉलेजों में 90 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली हैं. अब स्पॉट एडमिशन का अंतिम चरण चलना है. खासकर अर्थशास्त्र और अंग्रेजी जैसे विषयों में छात्रों की रुचि बेहद कम दिखाई दी है.

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28 कॉलेजों में 90 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली

जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंतर्गत छपरा, सीवान और गोपालगंज में हाल ही में 28 नए राजकीय डिग्री कॉलेज खोले गए हैं. इन कॉलेजों में अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी और सोशियोलॉजी विषयों में स्नातक की पढ़ाई शुरू की गई है. प्रत्येक विषय में 48-48 सीटें निर्धारित हैं, लेकिन तीन चरणों की मेधा सूची के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं.

स्पॉट एडमिशन में सीटें भरने की आखिरी उम्मीद

स्नातक सत्र 2026-30 के लिए पहली, दूसरी और तीसरी मेधा सूची जारी की जा चुकी है. अब दाखिले का अंतिम चरण स्पॉट एडमिशन के रूप में होना है. विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन के सामने खाली सीटों को भरना बड़ी चुनौती है. खासकर उन कॉलेजों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहां प्रमुख विषयों में नामांकन बेहद कम हुआ है.

अर्थशास्त्र में कई कॉलेजों में एक भी दाखिला नहीं

अर्थशास्त्र विषय में छात्रों की रुचि सबसे कम दिखाई दी है. इसुआपुर, बसंतपुर, आंदर, दरौली, गुठनी, कटेया और विजयपुर प्रखंडों में खुले राजकीय डिग्री कॉलेजों में अर्थशास्त्र विषय में अब तक एक भी नामांकन नहीं हुआ है. सारण के लहलादपुर, दरियापुर और इसुआपुर में भी इस विषय में केवल एक से दो विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है.

अंग्रेजी और सोशियोलॉजी में भी बेहद कम नामांकन

अंग्रेजी और सोशियोलॉजी विषयों में भी छात्रों की रुचि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. उपलब्ध जानकारी के अनुसार 28 कॉलेजों में इन विषयों की 48-48 सीटों के मुकाबले कई कॉलेजों में केवल तीन से चार छात्र-छात्राओं ने ही दाखिला लिया है. इससे इन विषयों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं.

हिंदी और इतिहास में नामांकन की स्थिति बेहतर

अर्थशास्त्र और अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी और इतिहास विषय में नामांकन की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है. एकमा के राजकीय डिग्री कॉलेज में तीसरे चरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इतिहास में केवल चार सीटें रिक्त बची हैं. लहलादपुर में भी इतिहास विषय में महज तीन सीट खाली हैं. प्रमंडल के कई अन्य कॉलेजों में भी इतिहास में विद्यार्थियों ने अच्छी रुचि दिखाई है.

बरौली और मशरक में हिंदी की सभी सीटें भरीं

हिंदी विषय में भी कई कॉलेजों में दाखिले की स्थिति संतोषजनक रही है. अधिकांश कॉलेजों में 30 से 40 फीसदी सीटों पर नामांकन हुआ है. गोपालगंज के बरौली और सारण के मशरक में हिंदी विषय की सभी सीटों पर दाखिला हो चुका है. पानापुर में इतिहास विषय में भी शत प्रतिशत सीटों पर नामांकन हुआ है.

राजनीति विज्ञान में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली

राजनीति विज्ञान में नामांकन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही. अधिकतर नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में इस विषय की 70 से 80 फीसदी सीटें अभी भी खाली हैं. इससे साफ है कि छात्रों की पसंद कुछ चुनिंदा विषयों तक सीमित रहने से नए कॉलेजों में विषयवार नामांकन में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है.

प्रचार-प्रसार की कमी बनी बड़ी वजह

नए कॉलेजों में कम नामांकन के पीछे प्रचार-प्रसार की कमी को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को घर के नजदीक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रखंड स्तर पर इन कॉलेजों की स्थापना की गई है. हालांकि कॉलेजों के उद्घाटन के बाद विद्यार्थियों तक इनके बारे में पर्याप्त और सटीक जानकारी नहीं पहुंच सकी.

ग्रामीण इलाकों में आवागमन भी बड़ी चुनौती

कई नए राजकीय डिग्री कॉलेज सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित प्लस टू स्कूलों से टैग किए गए हैं. ऐसे स्थानों तक नियमित आवागमन की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से भी छात्र-छात्राओं की परेशानी बढ़ रही है. इसी कारण कई विद्यार्थी फिलहाल प्रखंड स्तर पर खुले नए कॉलेजों के बजाय पुराने और प्रमुख कॉलेजों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

अगले सत्र में नामांकन बढ़ने की उम्मीद

विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि अगले सत्र से नए कॉलेजों में व्यवस्थाएं बेहतर होने के बाद नामांकन का प्रतिशत बढ़ेगा. विश्वविद्यालय छात्र कल्याण विभाग के अध्यक्ष डॉ. राणा विक्रम सिंह ने बताया कि इस वर्ष सिर्फ राजकीय डिग्री कॉलेजों में ही नहीं, बल्कि जिले के अन्य प्रमुख कॉलेजों में भी नामांकन कम हुआ है.

सभी नए कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति

डॉ. राणा विक्रम सिंह के अनुसार सभी नए डिग्री कॉलेजों में विषयवार दो-दो शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है. नियमित रूप से कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं. विश्वविद्यालय की ओर से विद्यार्थियों से स्पॉट एडमिशन के दौरान अधिक से अधिक संख्या में नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में दाखिला लेने की अपील की जा रही है.

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