छपरा में 9 सितंबर से शुरू हुआ राष्ट्रीय पोषण माह, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण पर रहेगा विशेष जोर
AI से बनाई गई तस्वीर
बिहार में 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है. इस दौरान बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जाएंगी. जीवन के पहले 1000 दिनों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
Saran News : बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार के उद्देश्य से बिहार में 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच, नवजात और छोटे बच्चों की घर पर देखभाल, स्तनपान को बढ़ावा देने, बच्चों के पोषण स्तर की जांच, एनीमिया की रोकथाम और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान व उपचार सहित कई गतिविधियां संचालित की जायेंगी.
जिले में शत-प्रतिशत गतिविधियां संचालित करने का निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति को राष्ट्रीय पोषण माह का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पाण्डेय, भा.प्र.से. की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि पोषण माह के दौरान संचालित सभी गतिविधियों की जिला और प्रखंड स्तर पर नियमित रिपोर्टिंग की जाये.
गतिविधियों की तस्वीरों सहित जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से विकसित पोषण अभियान के डैशबोर्ड पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया गया है. इसके लिए जिला, प्रखंड और आंगनवाड़ी केंद्र स्तर पर समाज कल्याण विभाग के संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों से आवश्यक सहयोग लेने को कहा गया है.
जीवन के पहले 1000 दिनों के पोषण पर विशेष जोर
डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान जीवन के पहले 1000 दिनों में समुचित पोषण को लेकर विशेष परामर्श दिया जायेगा. गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच और पोषण संबंधी सलाह सुनिश्चित की जायेगी.
स्वास्थ्य विभाग ने शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर और हीमोग्लोबिन की जांच ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) तथा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान कराने का निर्देश दिया है. गर्भावस्था की प्रथम तिमाही के बाद से प्रसव के छह माह बाद तक आयरन और कैल्शियम की खुराक उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है.
नवजात की देखभाल के लिए आशा कार्यकर्ता करेंगी गृह भ्रमण
गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (एचबीएनसी) के तहत आशा कार्यकर्ता प्रत्येक नवजात के जन्म के 42 दिनों के भीतर छह से सात बार गृह भ्रमण करेंगी. इस दौरान नवजात और छोटे बच्चों की देखभाल तथा पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी परिवार के सदस्यों को दी जायेगी.
छह माह तक केवल स्तनपान के लिए चलेगा जागरूकता अभियान
शिशु एवं छोटे बच्चे के आहार संबंधी कार्यक्रम (आईवाईसीएफ/मां) के तहत समुदाय स्तर पर गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के साथ बैठकें की जायेंगी. इसमें बच्चे को जन्म के बाद शीघ्र स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा छह माह के बाद पूरक आहार के साथ कम से कम दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखने को लेकर जागरूक किया जायेगा.
स्वास्थ्य संस्थानों में ममता कार्यकर्ता और आरएमएनसीएच ए परामर्शदाता प्रसव कक्ष तथा स्तनपान परामर्श केंद्र पर माताओं को स्तनपान से संबंधित आवश्यक सहयोग और परामर्श देंगे.
हर प्रखंड में एनीमिया जांच के लिए दो शिविर
एनीमिया मुक्त कार्यक्रम के तहत बच्चों, किशोर-किशोरियों और गर्भवती महिलाओं की जांच तथा आवश्यक परामर्श के लिए प्रत्येक प्रखंड में दो टी4 शिविर आयोजित किये जायेंगे. अभियान के दौरान एनीमिया की पहचान, रोकथाम और उपचार को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जायेगा.
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर होगी पहचान
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान, जांच और उपचार पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. इसके लिए जिला स्तर पर चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, अस्पताल प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं का क्षमता निर्माण किया जायेगा.
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की जांच के दौरान हीमोग्लोबिन, एचआईवी, सिफलिस, रक्तचाप, मूत्र में एल्ब्यूमिन और पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी आवश्यक जांचों की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी. स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक उपचार और परामर्श उपलब्ध कराना है.
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