छपरा के पॉश इलाके प्रभुनाथ नगर में सालों से जलजमाव, 10 हजार से अधिक लोग परेशान
प्रभुनाथ नगर में जलजमाव फोटो
छपरा के सबसे पॉश इलाकों में शुमार प्रभुनाथ नगर और उमानगर में जलजमाव की स्थायी समस्या ने 10 हजार से अधिक लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है. सालों से जमा पानी बदबू और बीमारियों का कारण बन रहा है, जिससे स्थानीय लोग अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं.
Prabhat Nagar Samasya: छपरा के सर्वाधिक पॉश इलाकों में गिने जाने वाले प्रभुनाथ नगर और उमानगर के कुछ हिस्सों में वर्षों से जलजमाव की स्थायी समस्या बनी हुई है. जिले के कई प्रमुख डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, व्यवसायी और जनप्रतिनिधियों के घर भी इसी इलाके में हैं. इसके बावजूद 10 हजार से अधिक की आबादी के लिए जलजमाव विकट समस्या बनता जा रहा है.
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पूरे क्षेत्र में अब तक नाले का निर्माण नहीं कराया जा सका है. इसके कारण बरसात के दिनों में यहां बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं. वहीं नयी बस्ती होने के कारण खाली पड़ी जमीन पर सालों भर पानी जमा रहता है. लंबे समय से जमा पानी सड़ने के कारण बदबू फैल रही है और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोहल्ले के कई इलाकों में महीनों से पानी जमा है. घरों में कीड़े-मकौड़े पहुंच रहे हैं और डेंगू-मलेरिया समेत अन्य बीमारियों का खतरा बना हुआ है. समस्या से परेशान लोगों ने अब संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, जल्द ही मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जा सकता है.
जलनिकासी के सभी रास्ते हो चुके हैं बंद
शहर का प्रमुख रिहायशी इलाका प्रभुनाथ नगर छपरा नगर निगम के परिसीमन से बाहर होने के कारण पंचायत क्षेत्र में आता है. इस इलाके में दो हजार से अधिक मकान हैं. इतनी बड़ी कॉलोनी होने के बावजूद अब तक व्यवस्थित नाले का निर्माण नहीं कराया जा सका है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब दो सौ से अधिक घर ऐसे थे, जिन्होंने नाले की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा था. कुछ वर्ष पूर्व प्रशासन की ओर से क्षेत्र में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया गया. उस समय लोगों में नाला निर्माण की उम्मीद जगी थी, लेकिन नाला निर्माण की योजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं.
लोग बताते हैं कि पहले क्षेत्र का पानी छोटे-छोटे नहरों के रास्ते ग्रामीण इलाकों की ओर निकल जाता था. बाद में तेजी से नये मकानों का निर्माण होने लगा और जलनिकासी के पुराने रास्ते बंद होते चले गये. इसके अलावा शहर के खनुआ नाले से भी क्षेत्र की कनेक्टिविटी बंद हो गयी. देखते ही देखते जलनिकासी के लगभग सभी रास्ते बंद हो गये और जलजमाव स्थायी समस्या बन गया.
कई बार हो चुका है उग्र आंदोलन
जलजमाव की समस्या को लेकर स्थानीय लोग कई बार जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं. समस्या के समाधान की मांग को लेकर कई बार क्षेत्र में उग्र आंदोलन भी हो चुका है. इसके बावजूद लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का रवैया अब भी उदासीन बना हुआ है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है. सड़क से लेकर आसपास के खाली मैदान तक पानी भर जाता है. इससे लोगों को घर से बाहर निकलने में परेशानी होती है.

जलजमाव के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
जलजमाव का असर अब बच्चों की पढ़ाई और खेलकूद पर भी पड़ने लगा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, आसपास के स्कूलों में बच्चों की संख्या घटने लगी है. अभिभावक जलजमाव के बीच बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं.
आसपास के सभी खाली मैदानों में पानी भरा रहने के कारण बच्चों के खेलने की जगह भी खत्म हो गयी है. स्कूल से छुट्टी के बाद खुले मैदान में खेलने वाले बच्चों का बचपन अब घर की चारदीवारी तक सिमटकर रह गया है.
शादी-ब्याह और कार्यक्रमों में भी परेशानी
जलजमाव से मोहल्ले में रहने वाले लोगों को सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने में भी परेशानी हो रही है. स्थानीय लोगों ने बताया कि जिन परिवारों के घर शादी-ब्याह या अन्य समारोह होते हैं, उन्हें मजबूरी में शहर के दूसरे इलाकों में जाकर कार्यक्रम का इंतजाम करना पड़ता है.
बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद भी कीचड़ और जमा पानी की समस्या बनी रहती है. लंबे समय तक पानी जमा रहने से महामारी और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. लोगों ने प्रशासन से स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कराने और नाला निर्माण की मांग की है.
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