छपरा-मांझी-दरौली-गुठनी मुख्य पथ पर ताजपुर का जर्जर पुल बना जानलेवा, पानी में भी जारी टोटो-ऑटो का परिचालन बंद

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क्षतिग्रस्त पुल

छपरा-मांझी-दरौली मुख्य पथ पर ताजपुर का जर्जर पुल हादसों को दावत दे रहा है. मुख्य पुल बंद होने के बाद अंग्रेजों के जमाने का पुराना पुल जान जोखिम में डालकर वाहनों का सहारा बना है. सरयू के बढ़ते जलस्तर से पुराने पुल पर पानी चढ़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है.

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Dilapidated Bridge: छपरा-मांझी-दरौली-गुठनी मुख्य पथ पर आवागमन का महत्वपूर्ण जरिया ताजपुर सड़क पुल इन दिनों हादसे को न्योता दे रहा है. पुल में दरारें आने के बाद जिला प्रशासन की तकनीकी टीम ने जांच कर इसे अपरित्यक्त घोषित कर दिया था. करीब साढ़े तीन महीने पहले जिला प्रशासन ने पुल के दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर बाइक को छोड़कर ट्रक, बस, कार, टोटो और ऑटो समेत सभी वाहनों का परिचालन बंद करा दिया था.

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मुख्य पुल बंद होने के बाद आम लोगों के लिए अंग्रेजों के जमाने में बना सौ वर्ष से भी अधिक पुराना छोटा पुल ही एकमात्र सहारा रह गया है. यह पुल पहले से ही जर्जर स्थिति में है और इसकी चौड़ाई भी काफी कम है. इसके बावजूद इसी पुल से प्रतिदिन सैकड़ों टोटो और ऑटो यात्रियों को लेकर गुजर रहे हैं.

सरयू के बढ़ते जलस्तर से पुराने पुल पर चढ़ा पानी

सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण दहा नदी में भी उफान आ गया है. दहा नदी का पानी ताजपुर के वर्षों पुराने पुल के ऊपर से बह रहा है. स्थिति यह है कि पुल पर करीब एक से डेढ़ फीट तक पानी बह रहा है और पुल का सड़क से संपर्क पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया है.

पुल पर पानी चढ़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक टोटो और ऑटो का परिचालन बंद नहीं कराया गया है. चालक जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से ही यात्रियों को पुल पार करा रहे हैं. इससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है.

पुल पर न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड

पूर्व उप प्रमुख राम कृष्ण सिंह ने बताया कि पुराना पुल पहले से ही कमजोर है. ऊपर से बाढ़ का पानी चढ़ने के कारण उसकी स्थिति और खतरनाक हो गयी है. पानी के तेज बहाव के बीच टोटो या ऑटो के पलटने का खतरा बना हुआ है.

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. पुराने पुल पर न तो बैरिकेडिंग की गयी है, न पुलिस बल की तैनाती है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल पर पानी चढ़ने के बाद लोगों को खतरे की जानकारी देने और वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए तत्काल व्यवस्था की जानी चाहिए.

वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक मुख्य ताजपुर सड़क पुल का मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो जाता और दहा नदी का पानी पुराने पुल से नीचे नहीं उतर जाता, तब तक सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुराने पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगायी जाए.

साथ ही छपरा-मांझी-दरौली मुख्य पथ पर आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की मांग की गयी है, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो और किसी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके.

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