उम्मीद के सहारे वक्त गुजार रहे अग्निपीड़ित

Published at :12 Apr 2017 3:21 AM (IST)
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उम्मीद के सहारे वक्त गुजार रहे अग्निपीड़ित

दिघवारा : प्रखंड के हराजी पंचायत के पुरुषोत्तमपुर गांव में सोमवार की दोपहर हुई अग्निकांड के बाद अग्निपीड़ित छह परिवारों के लोग दाने दाने को मोहताज हो गये हैं और उनलोगों को सिर छुपाने का भी ठिकाना नहीं बचा है. पीड़ित परिवारों के सभी लोग बेघर होकर चिलचिलाती धूप में रहने को विवश हैं. उन […]

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दिघवारा : प्रखंड के हराजी पंचायत के पुरुषोत्तमपुर गांव में सोमवार की दोपहर हुई अग्निकांड के बाद अग्निपीड़ित छह परिवारों के लोग दाने दाने को मोहताज हो गये हैं और उनलोगों को सिर छुपाने का भी ठिकाना नहीं बचा है. पीड़ित परिवारों के सभी लोग बेघर होकर चिलचिलाती धूप में रहने को विवश हैं. उन लोगों के पास न तन ढकने के लिए कपड़ा बचा है और न रात गुजारने के लिए आशियाना. सभी लोगों के जीवन भर की संचित कमाई भी आग की भेंट चढ़ गयी और आंसुओं के बीच किस्मत को कोसने के सिवाय उनलोगों के पास अब कुछ भी शेष नहीं बचा है.

रामबाबू व बबीता पर टूटा आफत का पहाड़ : अगलगी ने सबसे ज्यादे रामबाबू व बबीता को ताउम्र न भूलने वाला दर्द दिया है.उसके घर में तो एक दाना भी नहीं बचा.बबीता रोते हुए बोली कि उसके पास पांच बेटी व एक बेटा है.एक बेटी की शादी को किसी तरह कर दी, मगर अगलगी ने घर में रखे हर सामान को जला कर राख कर दिया. अब उसके परिवार के सात लोगों का पेट कैसे भरेगा, यह एक यक्ष प्रश्न बन गया है.
शोभा के कर्ज के दस हजार भी आग की भेंट चढ़े : श्यामबाबू मांझी की पत्नी शोभा देवी भी रोते हुए बोली कि फकुली गांव से एक पारिवारिक कार्य के लिए दस हजार रूपये कर्ज लेकर उसे घर के अंदर रजाई के नीचे रखी थी जो सोमवार की अगलगी में स्वाहा हो गया.अब उसके चार बच्चों के लिए घर में कुछ भी नहीं बचा है.राधिका देवी,संजू देवी व इंदू देवी ने बताया कि अगलगी में उनलोगों के घर में एक दाना भी नहीं बचा है.उधर मंगलवार को पीड़ित परिवारों के बच्चे बगल के खेत व गाछी में समय गुजारते नजर आये.
मजदूरी कर आगे बढ़ाते थे परिवार की गाड़ी : दलित मुहल्ले में जिन छह लोगों के घर तबाह हुए वे सभी लोग मजदूरी कर अपने परिवार की गाड़ी को आगे बढ़ा रहे थे. मजदूरी ही आजीविका का जरिया था और हर दिन की प्राप्त आमदनी से हर का खर्चा चलता था. अग्निकांड के वक्त भी घरों के लोग गेहूं की कटनी करने गये थे. अब जबकि अगलगी में सब कुछ तबाह हो गया है तो एक यक्ष सवाल यह भी है हर दिन की आमदनी से घरों के लोगों का पेट भरेगा तो जले आशियाना को कब तक बनाया जा सकेगा?
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