धंधेबाजों को मिल रहा संरक्षण : रूडी : रूडी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Oct 2016 4:21 AM (IST)
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अवैध खनन . केंद्रीय मंत्री रूडी बोले, प्रतिबंध के बावजूद अवैध बालू का व्यवसाय जारी छपरा : बालू का अवैध खनन व ओवरलोड वाहनों का परिचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित होने के बावजूद राज्य में अवैध बालू का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है. यह खुदरा में होने वाला अवैध कार्य नहीं बल्कि थोक भाव […]
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अवैध खनन . केंद्रीय मंत्री रूडी बोले, प्रतिबंध के बावजूद अवैध बालू का व्यवसाय जारी
छपरा : बालू का अवैध खनन व ओवरलोड वाहनों का परिचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित होने के बावजूद राज्य में अवैध बालू का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है. यह खुदरा में होने वाला अवैध कार्य नहीं बल्कि थोक भाव से बीच सड़क पर हो रहा है. इस पर कथित सुशासन बाबू की नजर नहीं है. राज्य की जनता ऐसे अवैध कारोबारों से पीड़ित है जबकि सुशासन का चादर ओढ़कर राज्य सरकार में शामिल तीन दलों राजद, कांग्रेस व जदयू के लोग घी पी रहे है. ऐसे में उनकी ‘सेहत’ तो दिनोदिन बढ़ती जा रही है,
मगर बिहार की आम जनता बाढ़, सुखाड़ के अलावा अवैध धंधेबाजों के भ्रष्ट चक्की में पीस रही है. बात केवल सारण के डोरीगंज में लाल बालू के अवैध कारोबार का नहीं है बल्कि पूरे राज्य में विभिन्न वस्तुओं का अवैध कारोबार जारी हैं. बिना राजनीतिक संरक्षण के ऐसे कारोबार संभव नहीं है. आश्चर्यजनक बात है कि सारण जिले से ही राज्य के परिवहन मंत्री भी है और खनन मंत्री भी. इसके बावजूद सारण में सैकड़ों ट्रकों के माध्यम से लाल बालू का अवैध कारोबार जारी है.
उक्त बातें स्थानीय सांसद सह केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री स्वतंत्र प्रभार राजीव प्रताप रूडी ने सारण के जिलाधिकारी दीपक आनंद की ओर से जिले में अवैध बालू कारोबार के उद्भेदन करने वाले कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही. उन्होंने कहा कि मकान बनाने के लिए लाल बालू का ही इस्तेमाल किया जाता है. जिसकी कीमत सफेद बालू से कई गुणा अधिक है. मंत्री रूडी ने कहा कि अवैध कारोबारियों की सत्ता तक पहुंच का ही असर है कि उन्हें ऊपरी स्तर से दस और बीस के नोट पर कोडिंग करके दिया जाता था, जिसे दिखलाने पर कोई भी पुलिस पदाधिकारी उस ट्रक की चेकिंग नहीं करता था.
नोट गले फटे नहीं इसलिए बजाप्ता लेमिनेशन कराकर यह नोट ट्रक ड्राइवरों को दिये जाते थे. बालू के इस अवैध कारोबार से सुशासन की सरकार की पोल खुल गयी है. इतना ही नहीं यह राज तब उजागर हुआ जब जिलाधिकारी दीपक आंनद ने बीते दिनों देर रात विभिन्न घाटों पर छापेमारी की. मंत्री ने कहा कि क्या राज्य सरकार यह बतायेगी कि बालू के अंदर शराब तो नहीं भेजा जाता था? उन्होंने कहा कि राजग के समय में बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि सुशासन के नायक के रूप में बनी थी जो लालू और कांग्रेस गठबंधन के साथ आने पर बिल्कुल धूमिल हो गयी है.
आम तौर पर जिले में जिलाधिकारी की छापेमारी टीम में आरक्षी अधीक्षक की उपस्थिति अनिवार्य होती है बावजूद इसके क्या कारण था कि छापेमारी टीम में एसपी अनुपस्थित रहे? ऐसी स्थिति में जब बिहार में चहुंओर शासन व्यवस्था के संरक्षण में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समय-समय पर भ्रष्ट अधिकारियों पर उंगली उठाने वाले सारण जिले से ही निर्वाचित राज्य के खनन मंत्री और परिवहन मंत्री है. क्या मंत्री द्वय जनता को अपने बयानों की स्पष्टता बताएंगे ?
क्या वे यह बताएंगे कि किस भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से महीनों से बालू का अवैध कारोबार हो रहा था. सवाल यह भी है कि आखिरकार बालू के अवैध कारोबार पर प्रशासन के महीनों बाद नजर किस कारण से पड़ी?
धंधेबाजों को मिल रहा है राजनीतिक संरक्षण
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