नवजात बच्ची को नोच कर खा गये कुत्ते

Published at :01 May 2016 8:55 AM (IST)
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नवजात बच्ची को नोच कर खा गये कुत्ते

रात के अंधेरे में किसी अभागन मां ने कूड़े पर फेंक दिया था जिंदा छपरा (सारण) : शहर के नगर थाना क्षेत्र के प्रमुख व्यावसायिक इलाके साहेबगंज चौक के पास एक नवजात बच्ची का शव शनिवार की सुबह मिलने से न केवल लोगों में सनसनी फैल गयी, बल्कि इस घटना ने मानवता को एक बार […]

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रात के अंधेरे में किसी अभागन मां ने कूड़े पर फेंक दिया था जिंदा

छपरा (सारण) : शहर के नगर थाना क्षेत्र के प्रमुख व्यावसायिक इलाके साहेबगंज चौक के पास एक नवजात बच्ची का शव शनिवार की सुबह मिलने से न केवल लोगों में सनसनी फैल गयी, बल्कि इस घटना ने मानवता को एक बार फिर शर्मसार किया है. इस घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गरम है.

घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे नगर थानाध्यक्ष रवि कुमार ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. इस घटना के बाबत लोगों में चर्चा है कि किसी अभागन कुंवारी मां की कोख से जन्मी नवजात को कूड़े के ढेर पर फेंक दिया गया था, तो कहीं इस बात की भी चर्चा है कि पुत्र की चाह रखने वाले किसी दंपती द्वारा पुत्री के जन्म लेने के कारण उसे रात के अंधेरे में कूड़े की ढेर पर लाकर फेंक दिया गया होगा,जिससे कुत्ता तथा अावारा जानवरों ने नोच-नोच कर क्षत-विक्षत कर दिया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

कानूनों का हो रहा है उल्लंघन : पुत्र की चाह रखने वाले दंपतियों द्वारा जन्म के तुरंत बाद नवजात बच्चियों को लावारिश हालत में फेंके जाने की घटनाएं जिले में लगातार हो रही हैं. इस वजह से न केवल सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ योजना को करारा झटका लग रहा है, बल्कि कन्या भ्रूणहत्या रोकने की सरकार तमाम कोशिशें नाकाम होती जा रही हैं.

लावारिस बच्चियों तथा अनचाहे संतानों को कानूनी रूप से दंपतियों द्वारा समर्पित करने के प्रावधानों का भी पालन नहीं हो रहा है. इसकी मुख्य वजह प्रचार-प्रसार का घोर अभाव है. सरकार द्वारा गठित विभिन्न इकाइयों के द्वारा भी इस दिशा में महज कागजी खानापूरी तथा सरकारी राशि की बंदर-बांट की जा रही है. इस मामले में कार्रवाई के लिए ठोस कानून का प्रावधान नहीं होना और पुलिस को कार्रवाई के लिए पर्याप्त अधिकार नहीं होना भी मुख्य कारण है.

बेटा-बेटी में अंतर मिटाने का हो रहा है प्रयास : बेटा-बेटी के बीच अंतर मिटाने के लिए सरकार के द्वारा कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलायी जा रही हैं.

नारी शिक्षा, नारी सशक्तीकरण, विभिन्न सरकारी सेवाओं में महिलाओं को आरक्षण, स्थानीय निकायों तथा पंचायतों, सहकारी संगठनों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य बेटा-बेटी के बीच समानता कायम करना है. इसके लिए कन्या सुरक्षा योजना, बालिका समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना, मुख्यमंत्री बालिका छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के अलावी स्नातक स्तर तक बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा देने के उपाय किये गये हैं.

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