लोक नृत्य व नाटकों का चलता रहा सिलसिला

Published at :05 Apr 2015 6:50 AM (IST)
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लोक नृत्य व नाटकों का चलता रहा सिलसिला

इप्टा के 15 वें राज्यस्तरीय सम्मेलन के दूसरे दिन कलाकारों ने प्रस्तुत किया सांस्कृतिक कार्यक्रम छपरा (नगर) : शनिवार को संगोष्ठी के बाद राम जयपाल कॉलेज में कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ, तो यह दौर देख शाम तक चलता रहा.पटना, बेगूसराय, मधेपुरा, पटना सिटी इप्टा के कलाकारों द्वारा लोकोत्सव, गीत संगीत, नृत्य एवं नाटकों की […]

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इप्टा के 15 वें राज्यस्तरीय सम्मेलन के दूसरे दिन कलाकारों ने प्रस्तुत किया सांस्कृतिक कार्यक्रम
छपरा (नगर) : शनिवार को संगोष्ठी के बाद राम जयपाल कॉलेज में कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ, तो यह दौर देख शाम तक चलता रहा.पटना, बेगूसराय, मधेपुरा, पटना सिटी इप्टा के कलाकारों द्वारा लोकोत्सव, गीत संगीत, नृत्य एवं नाटकों की प्रस्तुति की गयी.
पटना के निनाद द्वारा आम्रपाली नृत्य नाटिका ,वहीं सुदिप्ता घोष द्वारा भरत नाट्यम एवं जम्मू कश्मीर के कलाकारों द्वारा भांड पत्थर से आयी उषा बैले द्वारा रामायण गाथा को पांडवानी लोक गायन के माध्यम से खूब ताली बटोरी, तो झारखंड के पाइका तथा चंपारण जगदीशपुर के कलाकारों द्वारा कठपुतली के माध्यम से प्रस्तुत नाटक ने विशेष रूप से बच्चों में खासा उत्साह भर दिया.
देर शाम तक रंगमंच रहा गुलजार
शनिवार की शाम तो आयोजन स्थल के एक कोने में निर्धारित स्थल लोगों की भीड़ नुक्कड़ नाटक को देखने के लिए जमी नजर आयी. विभिन्न जिलों व राज्यों से आये इप्टा के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गीत, संगीत, लोक नृत्य एवं नुक्कड़ नाटकों को देखने के लिए क्या आम क्या खास सभी देशी अंदाज में बैठे इसका लुत्फ उठाते नजर आये. इस दौरान कुमारी सत्यवती सांस्कृतिक मंच पर सहरसा इप्टा की टीम द्वारा समाज में व्याप्त खामियों व हमारे सिस्टम के लूप होल की अपने नाटक बोले, तो मस्त के माध्यम से सशक्त अंदाज में प्रस्तुत किया. नाटक में पत्रकार की भूमिका में सोनी ने पत्रकारिता की गिरावट पर चोट किया, तो अन्य पात्रों ने पुलिस, पॉलिटिक्स व अन्य प्रोफेशन के सच को सामने रखा.
रंगमंच व चुनौतियां पर हुई गोष्ठी
बिहार इप्टा के 15 वें राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन भी रामजयपाल कॉलेज परिसर में विभिन्न राज्य व जिलों से आये इप्टा के कलाकारों से गुलजार रहा.
शनिवार की सुबह चरण वार आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में जनता का रंगमंच और चुनौतियों पर वक्ताओं ने विस्तार से चर्चा की. संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि रंगमंच को जनता से जोड़ने की बात कही. उन्होंने कहा कि सिनेमा व टेलीविजन ने लोगों को रंगमंच से दूर किया.
ऐसे में ज्वलंत मुद्दे व जनता से जुड़ कर ही रंगमंच को मजबूत बनाया जा सकता है. उधर दूसरे राष्ट्रीय जनता का संगीत और चुनौतियों पर अखिलेश दीक्षित ने अपना आलेख प्रस्तुत किया. अपने आलेख में उन्होंने रंगमंच में संगीत के योगदान की चर्चा करते हुए इसे जनता से सीधे जुड़ाव का माध्यम बताया. संगोष्ठी को अन्य वक्ताओं द्वारा भी संबोधित किया गया.
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