आईएमए के आह्वान पर हड़ताल पर रहे डॉक्टर

Updated at : 03 Jan 2018 12:35 AM (IST)
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आईएमए के आह्वान पर हड़ताल पर रहे डॉक्टर

बंद रहा सदर अस्पताल का ओपीडी, निजी अस्पतालों में भी नहीं हुआ इलाज छपरा(सारण) : आइएमए के आह्वान पर चिकित्सक मंगलवार को हड़ताल पर रहे. इसका असर सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों पर पड़ा. सदर अस्पताल के ओपीडी को चिकित्सकों ने बंद करा दिया. निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज नहीं हुआ. हालांकि सरकारी अस्पतालों […]

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बंद रहा सदर अस्पताल का ओपीडी, निजी अस्पतालों में भी नहीं हुआ इलाज

छपरा(सारण) : आइएमए के आह्वान पर चिकित्सक मंगलवार को हड़ताल पर रहे. इसका असर सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों पर पड़ा. सदर अस्पताल के ओपीडी को चिकित्सकों ने बंद करा दिया. निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज नहीं हुआ. हालांकि सरकारी अस्पतालों के आपातकालीन सेवा बहाल रहा. इलाज के लिए आये मरीजों का सहारा आपातकालीन कक्ष बना. हालांकि हड़ताली चिकित्सकों ने आपातकालीन कक्ष में बैठ कर मरीजों का इलाज किया. लेकिन बिना निबंधन के ही मरीजों की जांच कर सादा पर्ची पर दवा लिख दिया. हड़ताल के कारण आपातकालीन कक्ष में मरीजों की काफी भीड़ बढ़ गयी.
आपातकालीन कक्ष में वैसे मरीजों का ही निबंधन किया गया जो गंभीर रूप से घायल या बीमार थे. सामान्य रूप से बीमार मरीजों का इलाज हड़ताली चिकित्सकों ने किया. आपातकालीन सेवा को छोड़कर सभी अन्य सेवा बाधित कर दिया गया. चिकित्सकों ने बताया कि पांच सूत्री मांगों के समर्थन में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल किया गया है और मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को तेज किया जायेगा. आपातकालीन कक्ष में डॉ रविशंकर प्रसाद सिंह, डॉ मिथिलेंद्र कुमार सिंह, डॉ हरिशचंद्र प्रसाद, डॉ एसएस प्रसाद समेत कई अन्य चिकित्सकों ने मानव हीत में मरीजों का इलाज किया और हड़ताल का समर्थन भी किया.
आईएमए के नेता डॉ बीके श्रीवास्तव ने बताया कि हम एनएमसी का विरोध करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि यह एक पुल कोर्स है जिसके बाद आधुनिक दवा के अभ्यास के लिए आयुष को सक्षम करने से क्यूकीज को वैध बनाना होगा. यह केवल उन सीटों को भी बेचने के लिए है और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक आपदा होगा. उन्होंने कहा कि इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा, क्योंकि चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए अनुमति देने में कई दोष हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा को अपरिवर्तनीय बनाने की साजिश हो रही है, क्योंकि निजी प्रबंधन 60 से 100 प्रतिशत सीटों के लिए फीस तय करने के लिए मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के साथ समझौता करना है, क्योंकि एनएमसी मुख्य रूप से नामांकित निकाय होगा. यह संघीय ढांचे के विरुद्ध है, क्योंकि राज्यों ने प्रतिनिधित्व खो दिया है. एनएमसी के लिए नहीं सार्वजनिक स्वास्थ्य को बचाने और सस्ती, गुणवत्ता वाले मेडिकल शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों ने हड़ताल किया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
आईएमए के आह्वान पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों द्वारा हड़ताल किया गया है. इस वजह से मरीजों का उपचार बाधित रहा. हालांकि आपातकालीन कक्ष में मरीजों का इलाज किया गया. हड़ताल के कारण इलाज के लिए आये मरीजों का इलाज आपातकालीन कक्ष में कराया गया.
डॉ शंभुनाथ सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल
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