शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत: 15 हजार से अधिक एफआईआर और 298 को उम्रकैद, फिर भी फल-फूल रहा सिंडिकेट

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शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत: 15 हजार से अधिक एफआईआर और 298 को उम्रकैद, फिर भी फल-फूल रहा सिंडिकेट

बिहार के समस्तीपुर में शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। 10 वर्षों में 15 हजार से अधिक गिरफ्तारियां और करोड़ों की जब्ती के बाद भी स्थिति गंभीर है।

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समस्तीपुर शराबबंदी समीक्षा: बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग लगातार कड़े कदम उठा रहा है. अधीक्षक मद्यनिषेध कार्यालय समस्तीपुर द्वारा 1 अप्रैल 2016 से 16 अगस्त 2026 तक के जारी आंकड़े विभागीय सख्ती को बयां करते हैं. हालांकि, इस कड़ी कानूनी कार्रवाई और निगरानी के बावजूद समस्तीपुर जिले में अवैध शराब का काला कारोबार पूरी तरह थमने का नाम नहीं ले रहा है. गांव-कस्बों से लेकर शहरी इलाकों तक फैला नेटवर्क व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है.

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धड़ल्ले से चल रहा होम डिलीवरी का खेल

जिले में शराब माफियाओं की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि होम डिलीवरी की सुविधा हर ओर उपलब्ध होने की बात सामने आ रही है.

  • शहर की गलियों से लेकर सुदूर ग्रामीण चौराहों तक अवैध शराब की आसान उपलब्धता बनी हुई है.
  • इस सिंडिकेट को चलाने के लिए महिलाओं और छोटे बच्चों तक को तस्करी में ढाल बनाया जा रहा है.
  • माफियाओं ने इस गोरखधंधे से अकूत संपत्ति अर्जित कर ली है.
  • वर्चस्व की जंग और आपसी रंजिश के कारण कई छोटे-बड़े धंधेबाजों की हत्याएं भी हो चुकी हैं.
  • माफियाओं से साठगांठ के आरोप में कल्याणपुर थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिर चुकी है.

10 वर्षों में कार्रवाई और सजा का लेखा-जोखा

विभागीय आंकड़ों के अनुसार पुलिस और उत्पाद विभाग ने पियक्कड़ों और धंधेबाजों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है.

  • दर्ज मामले व गिरफ्तारी: कुल 15,910 प्राथमिकी दर्ज कर 11,268 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया.
  • शराब जब्ती: इस अवधि में 1,12,681 लीटर से अधिक देशी-विदेशी शराब जब्त की गई, जबकि 8,715 लीटर नष्ट होना बाकी है.
  • श्रेणीवार गिरफ्तारी: शराब पीने के आरोप में 10,432 और बेचने के आरोप में 5,477 लोग सलाखों के पीछे पहुंचे.
  • जुर्माना वसूली: शराब पीने वालों से अर्थदंड के रूप में ₹2.53 करोड़ से अधिक की राशि वसूली गई.
  • सख्त सजा: अदालत में ठोस पैरवी के चलते 298 अवैध कारोबारियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
  • मासिक अभियान: वर्ष 2026 में प्रति माह 2400 से 2800 छापेमारी कर निरंतर धरपकड़ की गई.

वाहनों की जब्ती और नीलामी से करोड़ों का राजस्व

मद्यनिषेध कानून के तहत तस्करों के वाहनों पर भी कठोर कार्रवाई की गई है. विभाग ने 462 वाहन जब्त किए, जिनमें 354 का अधिग्रहण हो चुका है.

  • उत्पाद विभाग: 296 वाहनों को नीलाम कर ₹2,23,53,660 का राजस्व जुटाया.
  • पुलिस विभाग: 1,803 वाहनों की नीलामी से ₹17,67,06,048 प्राप्त किए.
  • कुल योग: दोनों विभागों ने 2,099 वाहन नीलाम कर ₹19,90,57,708 की सरकारी आय अर्जित की.

प्रशासन का दावा है कि अवैध शराब के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी सख्त अभियान जारी रहेगा.

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