इलाज के अभाव में जंजीरों में मानवता, 10 साल से बेड़ियों में रामबाबू

Published at :08 May 2018 9:12 AM (IST)
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इलाज के अभाव में जंजीरों में मानवता, 10 साल से बेड़ियों में रामबाबू

अमन गौतम @समस्तीपुर संविधान ने हर व्यक्ति को स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार दे रखा है. मानसिक रूप से बीमार रामबाबू कापर (38) इससे वंचित है. जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर अवस्थित नीरपुर गांव का यह शख्स इलाज के अभाव में 10 वर्षों से बेड़ियों में जकड़ा है. रामबाबू की मां और पिता छबील […]

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अमन गौतम @समस्तीपुर
संविधान ने हर व्यक्ति को स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार दे रखा है. मानसिक रूप से बीमार रामबाबू कापर (38) इससे वंचित है. जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर अवस्थित नीरपुर गांव का यह शख्स इलाज के अभाव में 10 वर्षों से बेड़ियों में जकड़ा है.
रामबाबू की मां और पिता छबील कापर के पास बड़े शहर में ले जाकर उसका उपचार कराने लायक पैसे नहीं हैं. इसलिए उसके हिंसक व्यवहार से तंग आकर घरवालों ने हाथ-पांव में बेड़ियां डाल ताले जड़ दिये. उसकी मां कहती है कि तीन बेटों में सबसे बड़ा राम पहले गांव में ही रहकर मजदूरी करता था. शादी के बाद फरीदाबाद चला गया. जहां वह खेती-बाड़ी का करता था
12 वर्ष पहले लौट कर आया, तो उसका व्यवहार बदलने लगा. पहले तो हम लोगों ने उसे हल्के में लिया. बाद में वह हिंसक होने लगा. मां ने बताया कि इलाज कराया गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ. समस्तीपुर शहर के मानसिक रोग विशेषज्ञ के यहां दिखाया गया. लेकिन इलाज में पैसा बाधक बनने लगा. कर्ज में डूबे परिवार वालों ने इसे उसकी किस्मत समझ उसकी दो बेटियों रुबी व बेबी और एक बेटे दीपक के भविष्य संवारने में जुट गये.
रामबाबू के पिता छबील कहते हैं कि सड़क किनारे झोंपड़ी में पड़े उसके बेटे की बातें सुनकर हर कोई उपेक्षा भरी मुस्कान छोड़ कर आगे निकल जाता है. मदद करने कोई नहीं आता है. थोड़ी मदद मिली होती, तो अब तक वह ठीक हो गया होता.
संगीता को राम के ठीक होने की है उम्मीद
रामबाबू की पत्नी संगीता देवी कहती है कि दीपक के जन्म के बाद उसका पति बीमार हो गया. संगीता ने बताया कि उसने अपने बच्चों को ही शिक्षित करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है. बड़ी बेटी रुबी की शादी कर दी.
बेबी और दीपक पास के ही नीरपुर हाट स्थित मवि में पढ़ रहे हैं. उसका परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है. वह खेतों व लोगों के घरों में मजदूरी कर बच्चों को पाल रही है. संगीता को उम्मीद है कि जब उसका बेटा पढ़-लिख कर सफल नागरिक बन जायेगा. तब उसकी कमाई से अपने पति का अच्छे डाक्टर से इलाज करायेगी और आम लोगों की तरह जीने लायक बना लेगी.
आपने ही मामले को संज्ञान में दिया है. अविलंब सीएस व एसडीओ को भेज रिपोर्ट मंगा कर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
चंद्रशेखर सिंह, डीएम, समस्तीपुर
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