सहरसा नगर निगम की 4 योजनाओं पर सवाल, करोड़ों के काम में अनियमितता के आरोप
जांच के लिए निगम कार्यालय पहुंची टीम | Prabhat Khabar Network
सहरसा नगर निगम की करोड़ों की विकास योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं. वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग की शिकायत के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है. जानिए इस मामले में क्या है आरोप और कौन कर रहा है जांच.
Saharsa Nagar Nigam: सहरसा नगर निगम की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गुरुवार को जांच का दायरा और बढ़ गया. नगर निगम की चार अलग-अलग योजनाओं में वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग की शिकायत पर अपर समाहर्ता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची और संबंधित योजनाओं की संचिकाओं और अभिलेखों की जांच की.
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स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता चंदन कुमार सिंह की शिकायत पर मुख्यमंत्री के राज्य स्तरीय सहयोग पोर्टल के माध्यम से इस मामले में कार्रवाई शुरू हुई है. शिकायत में करीब तीन से चार करोड़ रुपये के कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर कराने और इस तरह निविदा प्रक्रिया से बचने का आरोप लगाया गया है.
हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल शिकायत पर आधारित हैं. इनकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी.
शिकायत के बाद नगर निगम पहुंची तीन सदस्यीय टीम
शिकायत की जांच के लिए अपर समाहर्ता निशांत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित की गयी है. टीम में डीएसपी मुख्यालय केपी सिंह और ग्रामीण कार्य विभाग के सहायक अभियंता भी शामिल हैं.
गुरुवार को टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची. अधिकारियों ने नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा से शिकायत में उल्लेखित योजनाओं से संबंधित दस्तावेज और संचिकाएं मांगीं.
इसके बाद योजनाओं से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की गयी. जांच का उद्देश्य यह देखना है कि योजनाओं की स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश, निर्माण, भुगतान और सामग्री की खरीद में निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं.
छोटे-छोटे हिस्सों में काम बांटने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब तीन से चार करोड़ रुपये के विकास कार्यों को कई छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर कराया गया.
शिकायत में दावा किया गया है कि ऐसा करने से निविदा प्रक्रिया से बचने की कोशिश की गयी. इसके अलावा विभागीय स्तर पर कराये जा रहे कार्यों में अभिकर्ताओं के माध्यम से कथित कमीशनखोरी का भी आरोप लगाया गया है.
अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि वास्तव में कार्यों का विभाजन नियमों के अनुरूप था या निविदा प्रक्रिया से बचने के लिए ऐसा किया गया.
शाहपुर के पार्क और पोखर सौंदर्यीकरण पर भी सवाल
शिकायत में नगर निगम के वार्ड नंबर सात स्थित शाहपुर में पार्क निर्माण, पोखर सौंदर्यीकरण और सेल्फी प्वाइंट निर्माण से जुड़े कार्यों को भी शामिल किया गया है.
आरोप है कि इन कार्यों को भी छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर कराया गया. शिकायतकर्ता ने निर्माण में स्थानीय बालू, घटिया ईंट और अन्य सामग्री के इस्तेमाल तथा कुछ सामग्री की कथित तौर पर अधिक दर पर खरीद किये जाने का आरोप लगाया है.
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ कई स्थानों पर शिलापट्ट या सूचना पट्ट नहीं लगाये जाने का मुद्दा भी उठाया गया है.
सूचना पट्ट नहीं होने की स्थिति में आम लोगों के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि योजना की कुल लागत कितनी है, काम किस एजेंसी को दिया गया है और इसे कब तक पूरा किया जाना है.
व्यवहार न्यायालय परिसर के पार्क पर भी शिकायत
व्यवहार न्यायालय भवन मैदान में पार्क निर्माण को लेकर भी शिकायत की गयी है.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यहां के काम को भी छोटे हिस्सों में बांटकर कराया गया और निविदा प्रक्रिया से बचने की कोशिश की गयी. निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और उसकी खरीद दर पर भी सवाल उठाये गये हैं.
इसी तरह हवाई अड्डे के निकट निर्माणाधीन पार्क की गुणवत्ता और काम में कथित अनियमितता को लेकर भी जांच की मांग की गयी है.
1.80 करोड़ के न्यू कॉलोनी पोखर पर नजर
नगर निगम के वार्ड नंबर 13 स्थित न्यू कॉलोनी पोखर के जीर्णोद्धार कार्य को लेकर भी शिकायत दर्ज करायी गयी है.
शिकायत के अनुसार, करीब 1.80 करोड़ रुपये के इस कार्य को कई हिस्सों में बांटकर कराया जा रहा है. यहां भी सूचना पट्ट नहीं लगाये जाने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और खरीद दर में कथित अनियमितता के आरोप लगाये गये हैं.
शिकायतकर्ता ने योजना की तकनीकी जांच के साथ भुगतान और कार्यादेश से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की है.
जांच रिपोर्ट बताएगी नियमों का कितना पालन हुआ
अपर समाहर्ता निशांत ने बताया कि जांच टीम ने मामले में विस्तृत जानकारी ली है. संबंधित अभिलेखों और संचिकाओं की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार कर संबंधित स्तर पर भेजी जायेगी.
अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि नगर निगम की इन योजनाओं में निविदा प्रक्रिया, कार्य विभाजन, तकनीकी मानक, सामग्री की गुणवत्ता, भुगतान और प्राक्कलन से जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं.
Saharsa Nagar Nigam: लगातार शिकायतों से निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
नगर निगम की योजनाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आने और अलग-अलग स्तर पर जांच होने से निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठ रहे हैं.
दूसरी ओर, शिकायत में लगाये गये आरोपों को अभी सही या गलत नहीं माना जा सकता. इसके लिए जांच प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है.
यदि जांच में आरोप सही पाये जाते हैं, तो संबंधित पदाधिकारी, एजेंसी या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की स्थिति बन सकती है. वहीं आरोप गलत पाये जाने पर शिकायतों की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जायेगी.
फिलहाल नगर निगम की चार योजनाओं से जुड़ी इस जांच पर शहरवासियों की नजर है. सरकारी राशि से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना ही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल बन गया है.
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