सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से कथित मारपीट पर बढ़ा आक्रोश, नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की
फोटो - तारकिशोर प्रसाद | Prabhat Khabar Network
सहरसा सदर अस्पताल में समाचार संकलन के दौरान एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. पत्रकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
सहरसा. सदर अस्पताल में शनिवार को समाचार संकलन के लिए पहुंचे एक पत्रकार के साथ चिकित्सक और कर्मियों द्वारा कथित अभद्र व्यवहार, मारपीट और जेवरात छीनने के आरोप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. घटना को लेकर पत्रकारों में आक्रोश है. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताया है.
तारकिशोर प्रसाद ने की घटना की निंदा
पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं. समाचार संकलन के दौरान पत्रकार के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाये जाने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की.
पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं : ओमप्रकाश
भाकपा नेता ओमप्रकाश नारायण ने कहा कि पत्रकार अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए अस्पताल पहुंचे थे. यदि किसी खबर या रिपोर्ट को लेकर किसी चिकित्सक अथवा कर्मी को आपत्ति थी तो उसका समाधान लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि पत्रकार से कथित मारपीट और जेवरात छीनने के आरोप गंभीर हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. पत्रकारों को डराने-धमकाने या उनकी आवाज दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जायेगी. प्रशासन को पत्रकार का पक्ष सुनकर जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए.
अस्पताल में कानून से ऊपर कोई नहीं : रितेश रंजन
भाजपा नेता रितेश रंजन ने कहा कि अस्पताल एक संवेदनशील स्थान है, जहां चिकित्सक, कर्मी, मरीज, परिजन और पत्रकार सभी के साथ मर्यादित व्यवहार होना चाहिए. यदि पत्रकार के साथ मारपीट और जेवरात छीनने की शिकायत सामने आयी है तो इसे सामान्य घटना मानकर नहीं टाला जा सकता.
उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी को भी अपने पद या प्रभाव के बल पर कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
दोषियों पर हो कठोर कार्रवाई : मिथिलेश विजय
वीआईपी के प्रदेश प्रवक्ता मिथिलेश विजय ने भी घटना पर आक्रोश जताया. उन्होंने कहा कि पत्रकार समाचार संकलन के लिए अस्पताल पहुंचे थे. उनके साथ इस प्रकार का कथित व्यवहार गंभीर मामला है. पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार की घटना को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए.
उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. कहा कि यदि आरोप सत्य पाये जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाना चाहिए.
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
घटना के बाद पत्रकार समुदाय में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. पत्रकारों का कहना है कि समाचार संकलन के दौरान कथित मारपीट और दुर्व्यवहार स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर चिंता का विषय है. पत्रकारों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. कार्रवाई नहीं होने पर पत्रकारों की ओर से विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी भी दी गयी है.
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरे मामले की वास्तविक स्थिति
पत्रकार की ओर से लगाए गये आरोपों और अस्पताल पक्ष के दावों की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. पत्रकार संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आवाज उठाये जाने के बाद प्रशासन पर भी मामले की पारदर्शी जांच कराने का दबाव बढ़ गया है. नेताओं ने कहा कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लायी जाए और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके विरुद्ध कानून के तहत कार्रवाई की जाए.
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