स्कूल में धूमधाम से मनी जन्माष्टमी, राधा-कृष्ण बने बच्चों ने मोहा मन, दही हांडी फोड़ने में दिखा जबरदस्त उत्साह

Author Amit Singh|Edited by Amit Kr Sinha
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पौराणिक पात्रों की वेशभूषा में छात्र व छात्राएं | Prabhat Khabar Network

सोनवर्षाराज के ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया. नन्हे-मुन्ने बच्चों ने राधा-कृष्ण बनकर मन मोह लिया और दही हांडी फोड़ने के रोमांच ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए.

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सोनवर्षाराज नगर पंचायत के मनोरी चौक स्थित ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम और भक्तिभाव के साथ मनाया गया. इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चे राधा-कृष्ण समेत विभिन्न धार्मिक पात्रों की वेशभूषा में सजकर विद्यालय पहुंचे. बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा विद्यालय परिसर कृष्ण भक्ति में सराबोर नजर आया. नृत्य, संगीत और लघु नाटकों के माध्यम से बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत कर दिया.

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राधा-कृष्ण के रूप में बच्चों ने मोहा सबका मन

जन्माष्टमी समारोह के दौरान बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक पात्रों का रूप धारण कर आकर्षक प्रस्तुति दी. नन्हे-मुन्ने बच्चों की वेशभूषा और प्रस्तुति ने विद्यालय में मौजूद शिक्षकों और अन्य विद्यार्थियों का ध्यान अपनी ओर खींचा. बच्चों ने नृत्य और संगीत के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी बाल लीलाओं को प्रस्तुत किया.

लघु नाटकों के जरिए भी कृष्ण की बाल लीलाओं और उनके संदेशों को रोचक तरीके से दर्शाया गया. बच्चों की प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा.

दही हांडी ने बढ़ाया जन्माष्टमी का रोमांच

कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण दही हांडी रहा. बच्चों के समूह ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए उत्साह के साथ हांडी फोड़ने का रोमांचक दृश्य प्रस्तुत किया. जैसे-जैसे बच्चे हांडी तक पहुंचने के लिए एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते गए, विद्यालय परिसर में मौजूद बच्चे और शिक्षक उत्साह से जयकारे लगाने लगे.

दही हांडी फूटते ही पूरा परिसर ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा. इस दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला.

भारतीय संस्कृति और संस्कारों से कराया परिचित

विद्यालय के निदेशक दीपक कुमार ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों से बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों की जानकारी मिलती है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन बच्चों को प्रेम, मित्रता, कर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के अंदर अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जुड़ाव पैदा करते हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यालय कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

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