खेत में खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच क्यों जरूरी, 30 कृषि उत्पाद विक्रेताओं को सिखाया गया वैज्ञानिक तरीका
कार्यक्रम में उपस्थित प्राचार्य व अन्य | Prabhat Khabar Network
अब कृषि उत्पाद विक्रेता किसानों को मिट्टी जांच के आधार पर सटीक उर्वरक सलाह देंगे. मंडन भारती कृषि महाविद्यालय में 30 विक्रेताओं को 15 दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया. इसका लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारना है.
Integrated Nutrient Management Training: खेत में फसल अच्छी हो, उत्पादन बढ़े और खेती की लागत भी कम हो. इसके लिए सिर्फ अधिक खाद डालना ही पर्याप्त नहीं है. मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है और फसल को कितनी मात्रा में उर्वरक की जरूरत है, इसकी सही जानकारी होना जरूरी है. इसी उद्देश्य से कृषि उत्पाद विक्रेताओं को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया.
मंडन भारती कृषि महाविद्यालय, अगवानपुर में कृषि उत्पाद विक्रेताओं के लिए आयोजित 15 दिवसीय प्रमाण-पत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को समापन हो गया. 15 अगस्त से दो सितंबर तक चले इस प्रशिक्षण में बिहार के विभिन्न जिलों से आए 30 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया.
समापन समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय के सह अधिष्ठाता सह प्राचार्य डॉ विनोद कुमार ने की. उन्होंने कहा कि कृषि उत्पाद विक्रेता किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं. किसान अक्सर खाद, उर्वरक और कृषि उत्पादों के संबंध में इन विक्रेताओं से सलाह लेते हैं. ऐसे में विक्रेताओं को वैज्ञानिक जानकारी मिलना सीधे किसानों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
अब मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक की सलाह
प्रशिक्षण के दौरान कृषि उत्पाद विक्रेताओं को मृदा परीक्षण आधारित खेती और संतुलित उर्वरक प्रयोग की जानकारी दी गयी. इसका उद्देश्य किसानों को जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए सही सलाह देने में सक्षम बनाना है.
डॉ विनोद कुमार ने कहा कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षणार्थी किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक के इस्तेमाल के संबंध में उचित मार्गदर्शन दे सकेंगे. इससे मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेती की लागत कम करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्रशिक्षण के दौरान हासिल वैज्ञानिक और व्यावहारिक ज्ञान को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की अपील की. साथ ही किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहा.
रासायनिक खाद के साथ जैविक स्रोतों का संतुलित इस्तेमाल जरूरी
महाविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मो अरशद अनवर ने कहा कि आज कृषि के सामने एक बड़ी चुनौती मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए अधिक उत्पादन हासिल करना है.
लगातार खेती और पोषक तत्वों के असंतुलित इस्तेमाल से मिट्टी के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. ऐसे में केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय जैविक खाद, जैव उर्वरक और अन्य पोषक तत्वों के स्रोतों का संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग जरूरी है.
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से किसानों के बीच मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक प्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया. उनका कहना था कि समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाकर किसान मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
30 प्रशिक्षणार्थियों को दी गयी सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के नोडल पदाधिकारी डॉ अमित पाण्डेय ने प्रशिक्षण की गतिविधियों और इसके उद्देश्यों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पाद विक्रेताओं की तकनीकी क्षमता विकसित करना है, ताकि वे किसानों को पोषक तत्व प्रबंधन से जुड़ी सही और वैज्ञानिक सलाह दे सकें.
15 दिनों के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को मृदा स्वास्थ्य, मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग, जैविक खाद, जैव उर्वरक और विभिन्न पोषक तत्वों के समुचित एवं समेकित उपयोग की जानकारी दी गयी.
इन विषयों पर प्रशिक्षणार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया. इससे उन्हें किसानों को खेती से जुड़ी समस्याओं पर अधिक उपयोगी और वैज्ञानिक सलाह देने में मदद मिलेगी.
कृषि उत्पाद विक्रेताओं के लिए इस तरह के प्रशिक्षण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि वे किसानों के रोजमर्रा के कृषि कार्यों से सीधे जुड़े होते हैं. खाद और कृषि उत्पाद खरीदने के दौरान किसान अक्सर उनसे जानकारी लेते हैं. ऐसे में यदि विक्रेता मिट्टी की जरूरत और फसल की आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक सलाह दें, तो किसानों को अनावश्यक उर्वरक इस्तेमाल से बचने में मदद मिल सकती है.
इससे एक ओर खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी के स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखने की दिशा में भी बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.
Integrated Nutrient Management Training: प्रमाण-पत्र पाकर प्रशिक्षणार्थियों ने बताया उपयोगी अनुभव
समारोह के अंत में सभी 30 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण पूर्णता प्रमाण-पत्र वितरित किए गए. प्रशिक्षणार्थियों ने कार्यक्रम को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया. उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता जतायी.
समापन समारोह में महाविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. बिहार के विभिन्न जिलों से आए प्रशिक्षणार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.
इस प्रशिक्षण का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव अब खेतों तक पहुंचने वाला ज्ञान होगा. कृषि उत्पाद विक्रेताओं के माध्यम से मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग और समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है. यदि किसान अपनी मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे उत्पादन के साथ मिट्टी की सेहत और खेती की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है.

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