आरण में मोर संरक्षण केंद्र के लिए चयनित जमीन का डीएफओ ने किया निरीक्षण.
सरकारी जमीन का निरीक्षण करते डीएफओ | Prabhat Khabar Network
सहरसा जिले के आरण गांव में मोर संरक्षण केंद्र के निर्माण की दिशा में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है. प्रभागीय वन पदाधिकारी ने चयनित स्थल का निरीक्षण किया और जल्द निर्माण कार्य शुरू होने का आश्वासन दिया है.
सहरसा जिले के सत्तर कटैया प्रखंड अंतर्गत आरण गांव में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी 'मोर संरक्षण केंद्र' (Peacock Conservation Center) के निर्माण की दिशा में प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है. परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मंगलवार को प्रभागीय वन पदाधिकारी (DFO) ने चयनित स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया.
निरीक्षण के उपरांत डीएफओ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है और बहुत जल्द ही संरक्षण केंद्र के निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा.
डीएम के नेतृत्व में पहले ही चिन्हित की जा चुकी हैं दो जमीनें
आरण गांव में बड़ी संख्या में निवास करने वाले मोरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जिला प्रशासन पूरी गंभीरता से जुटा है:
- प्रशासनिक टीम का संयुक्त दौरा: इससे पूर्व सहरसा के जिलाधिकारी (डीएम) दीपेश कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन की उच्चस्तरीय टीम ने आरण गांव का सघन दौरा कर मोर संरक्षण केंद्र के लिए उपयुक्त दो अलग-अलग स्थलों पर जमीन चिन्हित की थी.
- अंचलाधिकारी (CO) को सख्त निर्देश: जिला स्तरीय टीम ने सत्तर कटैया के अंचलाधिकारी को चिन्हित जमीनों की विस्तृत नापी प्रतिवेदन, नजरी नक्शा, जमीन की किस्म (खाता, खसरा, रकबा) तथा विस्तृत लैंड रिकॉर्ड रिपोर्ट अविलंब जिला मुख्यालय को समर्पित करने का निर्देश दिया था.
आरण गांव: मोरों के लिए प्राकृतिक अभयारण्य
आरण गांव लंबे समय से राष्ट्रीय पक्षी मोर और इंसानों के बीच अद्भुत सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण रहा है:
- प्राकृतिक वास स्थल: यहां सैकड़ों की संख्या में मोर खुले वातावरण में विचरण करते हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं.
- संरक्षण की आवश्यकता: उचित बाउंड्री, चिकित्सा सुविधा, छायादार वृक्षों और संतुलित आहार व्यवस्था के अभाव में मोरों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से आधिकारिक संरक्षण केंद्र की मांग कर रहे थे.
- ईको-टूरिज्म को बढ़ावा: इस केंद्र के निर्माण से सहरसा जिला न केवल जैव विविधता संरक्षण के राष्ट्रीय मानचित्र पर उभरेगा, बल्कि यहां पर्यावरण पर्यटन (ईको-टूरिज्म) की असीम संभावनाएं भी विकसित होंगी.
निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे ग्रामीण व कार्यकर्ता
डीएफओ के स्थल निरीक्षण के दौरान वन विभाग के कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता अमित कुमार, कृष्ण कुमार कुंदन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. ग्रामीणों ने वन विभाग से केंद्र का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कराने का आग्रह किया, ताकि दुर्लभ पक्षियों को सुरक्षित वातावरण मिल सके.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए