मिथिला ही नहीं देश के धरोहर है वद्यिापति: प्रवीण

Published at :20 Nov 2015 6:46 PM (IST)
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मिथिला ही नहीं देश के धरोहर है वद्यिापति: प्रवीण

मिथिला ही नहीं देश के धरोहर है विद्यापति: प्रवीण मिथिला संस्कृति महोत्सव का हुआ उद्घाटनसांस्कृतिक कार्यक्रम का भी हुआ आयोजनसहरसा नगरगुरुवार को जिला मुख्यालय से सटे लक्ष्मीनिया स्थित विद्यापति धाम में दो दिवसीय मिथिला संस्कृति महोत्सव का उदद्याटन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल गौतम राजरिशी और बिराटनगर से आए मैथिली अभियानी प्रवीण नारायण चौधरी […]

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मिथिला ही नहीं देश के धरोहर है विद्यापति: प्रवीण मिथिला संस्कृति महोत्सव का हुआ उद्घाटनसांस्कृतिक कार्यक्रम का भी हुआ आयोजनसहरसा नगरगुरुवार को जिला मुख्यालय से सटे लक्ष्मीनिया स्थित विद्यापति धाम में दो दिवसीय मिथिला संस्कृति महोत्सव का उदद्याटन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल गौतम राजरिशी और बिराटनगर से आए मैथिली अभियानी प्रवीण नारायण चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया. देवनाथ यादव की अध्यक्षता व किसलय कृष्ण के संचालन में चले पहले सत्र को मिथिला के विभिन्न भागों से आए साहित्यकार अजित आजाद,सतीश मेहता,शैलेन्द्र शैली,रिषी वशिष्ठ,मुखिया अरविन्द यादव आदि ने सम्बोधित किया. मुख्य अतिथि के रुप मे अपना वक्तव्य रखते हुए प्रवीण नारायण चौधरी ने कहा कि यह धाम अपने उद्घाटन के महज एक साल मे मिथिला का एक प्रमुख पर्यटन केन्द्र बन चुका है. उन्होंने इसकी ब्राडिंग पर बल देते हुए कहा कि हरियाणा बेल्ट नहीं यह क्षेत्र तो सम्पूर्ण रुप से मिथिला बेल्ट है. उन्होंने कहा कि कवि विद्यापति मिथिलांचल ही नहीं देश के धरोहर है. अजित आजाद ने यहां एक विशाल सामुदायिक भवन की आवश्यकता बताते हुए वर्तमान राजनीतिक सन्दर्भ पर डिगडिगिया बजबे दे….जनताके जगबे दे गीत सुनाकर दर्शक मे नए जोश का संचार कर दिया. इस अवसर पर संस्था की तरफ से आगत अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष पत्रकार आलोक झा को निर्भीक पत्रकारिता के लिए तो पवन नारायण को गायकी के लिए सम्मानित किया गया. इस सत्र मे मंच पर भोगेन्द्र शर्मा निर्मल,रामोश्वर पान्डे,विद्यानन्द यादव,सागर राय आदि उपस्थित थे. युवा समीक्षक शैलेन्द्र शैली ने इस आयोजन को एक ऐतिहासिक पहल करार देते हुए भाषा संस्कृति के संरक्षण पर तो जोर दिया ही ,साथ ही लछमिनिया के युवाओं के उत्साह की प्रशंसा की.पवन के सुर पर झूमते रहे लोगदुसरे सत्र मे मैथिली फिल्म के प्रसिद्ध पार्श्व गायक पवन नारायण ने जग जतय पहिने उगय सुरुजदेव कोशी कमला बलान रे… एहि धरती पर घर मोरा भइया जतय विद्यापति धाम रे गाकर श्रोतागण का मन मोह लिया. जिसके उपरान्त जनकपुर से आए नवीन मिश्र ,कंचन पाण्डेय, सपना ,सन्नी आदि ने देर रात तक अपनी प्रस्तुति देकर परिसर को मैथिली के रंग मे सराबोर कर दिया. इस सत्र के संचालन का जिम्मा भी किसलय कृष्ण के हाथ मे था. कार्यक्रम को सफल बनाने मे मनोज यादव,सभापति यादव,सिकन्दर,दिलीप राम,चन्द्र किशोर पजियार,दिलीप राम,सत्यम कुमार,आशुतोष यादव का योगदान सराहनीय रहा .फोटो-उद्घाटन 19- कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथिफोटो- उद्घाटन 20- कार्यक्रम प्रस्तुत करते गायक पवन नारायण

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