15 दिनों में रेलवे की जमीन से हटाएं अतिक्रमण

Updated at : 07 May 2019 5:51 AM (IST)
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15 दिनों में रेलवे की जमीन से हटाएं अतिक्रमण

सहरसा : सहरसा-मधेपुरा पुराने रेलखंड को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू कर दी गयी है. रेलवे ने सोमवार को प्रशांत रोड एवं बस स्टैंड के सौ से अधिक अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमा 15 दिनों के अंदर जगह-जमीन खाली करने का फरमान दे दिया है. पूर्व मध्य रेल के सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने हस्ताक्षरित नोटिस में […]

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सहरसा : सहरसा-मधेपुरा पुराने रेलखंड को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू कर दी गयी है. रेलवे ने सोमवार को प्रशांत रोड एवं बस स्टैंड के सौ से अधिक अतिक्रमणकारियों को नोटिस थमा 15 दिनों के अंदर जगह-जमीन खाली करने का फरमान दे दिया है.

पूर्व मध्य रेल के सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने हस्ताक्षरित नोटिस में स्पष्ट कहा है कि उन्होंने अनधिकृत रूप से रेलवे की जमीन का अतिक्रमण कर रखा है. अतिक्रमण कर रखे गये रेलवे की जमीन से अपना अतिक्रमण सूचना प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर खाली कर लें. अन्यथा रेल प्रशासन द्वारा इसे जबरन खाली करा दिया जायेगा एवं इसे हटाने में आने वाले खर्च की वसूली भी अतिक्रमणकारियों से ही की जायेगी.
सेक्शन इंजीनियर ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी प्रकार के नुकसान के लिए अतिक्रमणकारी ही जिम्मेदार होंगे, रेल प्रशासन नहीं.
बिछेगी पटरी, सीटी बजायेगी रेलगाड़ियां
लगभग 60 दशक के बाद एक बार फिर गंगजला-पंचवटी के रास्ते से सहरसा-मधेपुरा रेललाइन गुजरेगी. इस रूट में रेलवे की पर्याप्त जमीन हैं. सहरसा जंक्शन से बस स्टैंड, गंगजला चौक, पंचवटी, आजाद चौक, तिरंगा चौक, हनुमान चौक होते हुए कारू खिरहरि हॉल्ट तक फिर से पटरी बिछायी जायेगी. ट्रेनों के परिचालन के लिए 25000 वोल्ट के ओवरहेड तार गुजारे जायेंगे. मालूम हो कि पूर्व में सहरसा-मधेपुरा की यही रेललाइन थी.
इसे बाद में राजनैतिक कारणों से चार किलोमीटर की दूरी से घुमा कर स्टेशन से मिला दिया गया था. इन घुमावदार पटरियों से ट्रेनों के आने के बाद कहीं और जाने के लिए इंजन की शंटिंग करनी पड़ती थी. घुमावदार रास्ते से गुजरने के कारण ट्रेन को स्पीड काफी कम करनी पड़ती थी.
समय भी अधिक लगता था. पुराने रास्ते से ट्रेनों को एक बार फिर गुजारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इससे इंजन की स्पीड भी कम करने की जरूरत नहीं होगी और न ही इंजन शंटिंग का ही झमेला रहेगा. सबसे बड़ी बात यह होगी कि सहरसा जंक्शन से लंबी दूरी तक जाने वाली राजधानी सहित अन्य ट्रेनों को गुजारा जा सकेगा.
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