बाबा कारू संग्रहालय के बंद रहने से वस्तुओं के दर्शन दुर्लभ

Updated at : 30 Apr 2019 7:18 AM (IST)
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बाबा कारू संग्रहालय के बंद रहने से वस्तुओं के दर्शन दुर्लभ

सहरसा : मत्स्यगंधा परिसर स्थित बाबा कारू खिरहर प्रमंडलीय संग्रहालय पिछले तीन माह से बंद रहने से लोगों को संग्रहालय के अंदर रखें वस्तुओं के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं. वर्ष 2004 में तत्कालीन कला संस्कृति एवं युवा मंत्री अशोक कुमार सिंह ने इस संग्रहालय का विधिवत उद्घाटन किया था. बीच के वर्षों में […]

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सहरसा : मत्स्यगंधा परिसर स्थित बाबा कारू खिरहर प्रमंडलीय संग्रहालय पिछले तीन माह से बंद रहने से लोगों को संग्रहालय के अंदर रखें वस्तुओं के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं. वर्ष 2004 में तत्कालीन कला संस्कृति एवं युवा मंत्री अशोक कुमार सिंह ने इस संग्रहालय का विधिवत उद्घाटन किया था. बीच के वर्षों में संग्रहालय में हुई चोरी को देखते हुए इसे बंद कर दिया गया था.

लेकिन 2013 में पुनः इसे आम लोगों के लिये खोल दिया गया. वर्ष 2015 में बेतिया संग्रहालय में तैनात चतुर्थवर्गीय कर्मी अवधेश प्रसाद चौरसिया को यहां प्रतिनियुक्त किया गया. जिनके 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने के बाद से संग्रहालय में ताला बंद है. विभाग द्वारा न तो सेवानिवृत्त कर्मी से अभी तक प्रभार लिया गया है न ही किसी कर्मी की तैनाती की गयी है.
पूछे जाने पर सेवानिवृत्त कर्मी श्री चौरसिया ने बताया कि संग्रहालय का संचालन भागलपुर से किया जा रहा है. वह अपनी सेवानिवृत्ति की जानकारी भागलपुर व पटना स्थित विभाग को दे दिया है. इसके बावजूद भी विभाग द्वारा अभी तक उन्हें प्रभार देने संबंधी निर्देश नहीं मिल पाया है. जिससे उन्हें भी परेशानी हो रही है व सेवानिवृत्त लाभ में परेशानी हो रही है.
वहीं संग्रहालय की सुरक्षा को लेकर वर्ष 2018 में 11 लाख से अधिक राशि से चहारदीवारी का निर्माण किया गया व दो मुख्य गेट बनाये गये थे. जिन पर अब ताले लटक रहे हैं. संग्रहालय की सुरक्षा एक बार फिर भगवान भरोसे रह गया है. संग्रहालय के चहारदीवारी के अंदर मत्स्यगंधा झील में चलने वाली दर्जनों पैडल बोट को रख दिया गया है एवं परिसर में जंगली घास उग आया है.
बंद होने का लोगों को हो रहा संदेह
अपनी कला संस्कृति की जानकारी को लेकर बनाया गया संग्रहालय एक बार फिर से प्रशासनिक कोपभाजन का शिकार बनता दिख रहा है. वर्ष 2004 में जब इस संग्रहालय का उद्घाटन किया गया था तब इस संग्रहालय में अनेक तरह के जानकारियों से संबंधित पुरातात्विक महत्व के सामान, सिक्के सहित अन्य वस्तुएं रखी गयी थी.
इसके सुरक्षा को लेकर संग्रहालय के निकट एक पुलिस पिकेट बना जो आज भी है. इस पिकेट पर रहने वाले होमगार्ड के जवानों से अन्य कार्य लिया जा रहा है. वहीं सुरक्षा की कमी का लाभ उठाते हुए चोरों ने संग्रहालय से कीमती समानों की चोरी कर ली.
बढते चोरी की घटना से परेशान विभाग ने संग्रहालय को बंद कर संग्रहालय के सामनों को पटना के संग्रहालय में रख दिया. जिले से लोगों के बढते दबाव पर विभाग ने एकबार फिर 2013 में इसे आमजनों के लिये खोल एक कर्मी की तैनाती की उनके स्थानांतरण के बाद श्री चौरसिया प्रतिनियुक्त किया गया.
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