नकली मिठाई के चक्कर में अब लड्डू व बूंदी भी हैं संदेह के घेरे में

Updated at : 13 Oct 2017 2:00 PM (IST)
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नकली मिठाई के चक्कर में अब लड्डू व बूंदी भी हैं संदेह के घेरे में

गड़बड़ी. फेस्टिव सीजन में खाने-पीने की चीजों को लेकर बरतें सावधानी पटना निर्मित कई मिठाइयों का बाजार में होता है धड़ल्ले से प्रयोग नकली खोआ व पनीर से सजेगा बाजार सहरसा : त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है और त्योहारी सीजन में मिठाई की बात ना हो, ऐसा हो नहीं सकता. इसी बीच दीपावली […]

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गड़बड़ी. फेस्टिव सीजन में खाने-पीने की चीजों को लेकर बरतें सावधानी
पटना निर्मित कई मिठाइयों का बाजार में होता है धड़ल्ले से प्रयोग
नकली खोआ व पनीर से सजेगा बाजार
सहरसा : त्योहारों का मौसम शुरू हो गया है और त्योहारी सीजन में मिठाई की बात ना हो, ऐसा हो नहीं सकता. इसी बीच दीपावली की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं. साथ ही सीजन में मिलावटी मीठाई के नाम पर मुनाफा कमाने वाले भी एक्टिव हो गये हैं. मिलावटी मिठाई आंतों के लिए खतरनाक साबित होती है और इससे पाचन तंत्र पर सीधा असर पड़ता है.
फूड प्वॉइजनिंग से लेकर किडनी और लिवर तक भी इनसे खराब हो सकते हैं. अगर त्योहारों पर आप भी बाजार में मिठाई खरीदने जाएं तो इन तरीकों से पता लगाया जा सकता है कि कहीं आप को बेची गयी मिठाई नकली तो नहीं है. दानेदार मावा में भी मिलावट की शिकायत मिल रही है. शुद्ध मावा हमेशा मुलायम होता है. आप मावे को उंगलियों के बीच मसलें अगर यह दानेदार लगता है तो मावा मिलावटी है.
इसके अलावा मिलावटी खोये से बनी मिठाइयों से परहेज करने की आवश्यकता है. मिठाइयों को तेज रंग देने के लिए आर्टिफिशियल रंगों का बड़े पैमाने पर किया जाता है. मिठाईयों के तेज रंग से भी मिठाई के नकली होने का अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि कुछ दिन पूर्व सदर एसडीओ द्वारा किये गये छापेमारी में शहर में हो रहे काले कारनामे की पोल भी खुली थी.
लड‍्डू भी नहीं रहा असली: दुर्गापूजा, दीपावली, धनतेरस और छठ में मिठाइयों की डिमांड बढ़ जाती है. पर्व को लेकर लोगों द्वारा मिठाइयों की जम कर खरीदारी की जाती है.
पर्व व त्योहारों के मौके पर मिठाइयों की खरीद व प्रयोग जरा संभलकर ही करनी चाहिए. पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि पर्व त्योहारों के मौके पर मिठाई माफिया द्वारा घातक रसायन को मिला कर नकली मिठाई बेची जा रही है. वर्तमान में उपलब्ध लड्डू में भी पैकिंग बूंदी के प्रयोग से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. पहले दुकानदार बेसन का बूंदी स्वयं बनाते थे. अब नकली रिफाइन में तैयार रेडिमेड बूंदी का अधिकांश जगहों पर धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है.
बाजार में ग्राहकों का हो रहा शोषण: पूर्व के समय में जिला प्रशासन के सहयोग से फूड विभाग ने मिठाई दुकानों का सैंपल इकट्ठा किया था. जिसमें नकली मिठाई बिक्री का मामला पकड़ में आया था. लेकिन विभाग ने अभी तक मामले में कितनी कार्रवाई की इसकी खुलासा नहीं किया गया है.
आमतौर पर देखा जाये तो धार्मिक पर्व त्योहारों में मिठाई की डिमांड ज्यादा रहने के कारण बाजारों में धंधेबाज मिलावटी सामान बेचकर अधिक मुनाफा कमाने की फिराक में रहते हैं. सूत्रों की मानें तो इस तरह के धंधेबाज ने शहर की कई मिठाई दुकानों तक अपनी पैठ बना ली है. कई दुकानों के बारे में यह भी चर्चा है कि ये बिना निबंधन के चल रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक शहर में सौ से अधिक मिठाई की दुकानें हैं.
क्या कहते हैं चिकित्सक
स्थानीय चिकित्सक डॉ जयंत आशीष बताते है कि नकली खोआ व पनीर में केमिकल का प्रयोग किया जाता है. इसके सेवन से मानव शरीर के अंदर पाचन तंत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. जो बाद के समय में किडनी व लिवर को नुकसान पहुंचाती है. खासकर पर्व-त्योहार के समय पर नकली मिठाई ज्यादा बिकने लगती है. ऐसे समय में खानपान में संयम व सावधानी बरतने की आवश्यकता है.
बाजार में नकली खोआ के जरिये कई प्रकार की मिठाइयां बनायी जाती है. खोआ से बने बरफी, मिल्क केक, डोडा बरफी तथा छेना से बने कई मिठाइयों में मिलावट का खतरा अधिक रहता है. सूत्रों की मानें तो इन दिनों बूंदी से बने लड्डू व सूखे मेवा से बने मिष्ठान्न भी मिलावट के खतरे से अछूते नहीं हैं. बड़े पैमाने पर बूंदी तैयार करने के लिये सिंथेटिक केमिकल का सहारा लिया जाता है.
छेना में सस्ती पनीर का लेते हैं सहारा : छेना और पनीर की मिठाई बनाने में दूध का प्रयोग होता है. इस कारण दूध में भी मिलावट किया जाता है.
जानकारों की माने तो यूरिया, पाउडर, उजला खल्ली सहित अन्य कैल्सियम मिला कर दूध को गाढ़ा बना कर बाजारों में बेचा जाता है. यह मिठाई को नुकसान पहुंचाता है तथा इसे खाने से लोग बीमारियों के चपेट मे आ जाते हैं. ज्ञात हो कि पर्व त्योहार के मौके पर दूध की डिमांड बढ़ जाती है. लिहाजा फर्जी कारोबारी ऐसे मौके का फायदा उठाते हैं.
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