शक करने की प्रवृत्ति बढ़ जाना भी मनोरोग

Updated at : 29 Jun 2018 5:21 AM (IST)
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शक करने की प्रवृत्ति बढ़ जाना भी मनोरोग

सासाराम ऑफिस : मानसिक रोग के आंकड़े बताते हैं कि आत्महत्या करनेवाले को समय पर मानसिक उपचार मिलता तो शायद उनका जीवन बचाया जा सकता था. मेडिसिन व साइकोलाॅजिकल तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क के केमिकल में बदलाव कर आत्महत्या को बिल्कुल रोका जा सकता है. यह बात नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ विप्लव कुमार सिंह ने […]

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सासाराम ऑफिस : मानसिक रोग के आंकड़े बताते हैं कि आत्महत्या करनेवाले को समय पर मानसिक उपचार मिलता तो शायद उनका जीवन बचाया जा सकता था. मेडिसिन व साइकोलाॅजिकल तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क के केमिकल में बदलाव कर आत्महत्या को बिल्कुल रोका जा सकता है.
यह बात नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ विप्लव कुमार सिंह ने बाराडीह गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में डीएमएचपी की तरफ से आयोजित मनोरोग पर चर्चा के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि मनोरोगियों में जीवन के प्रति उमंग दोबारा जागृत करायी जा सकती है. वैसे ही भावुक व्यक्ति मानसिक रोग से ज्यादा पीड़ित होते हैं, अतः ऐसे व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक रहने की आवश्यकता होती है. गुस्सा, शक्कीपन पति-पत्नी में तनाव की वजह बन जाती है, बहुत लोगों को पता ही नहीं है कि यह भी मनोरोग के कारण हो सकते हैं.
डॉ कुमार ने कहा कि मानसिक रोग नींद, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, उदासी से शुरू होती है और गंभीरावस्था में आते-आते शक्कीपन, अपने आप से बुदबुदाना, कुड़ा-करकट इकट्ठा करना, रोनेवाली जगह पर हंसना व हंसने वाली जगह पर रोना, भावनाओं पर कंट्रोल समाप्त हो जाना, भूत-प्रेत या फिर भगवान से बातें करना, पानी के छिंटों को गंदा समझ कर बचना, अपने को संसार या देश का महान व्यक्ति का समझने की प्रबलता आदि की तरफ बढ़ जाती है.
इस तरह के लक्षणोंवाले व्यक्ति का इलाज कराने पर वह ठीक हो जाता है. पर, ध्यान देना आवश्यक है कि सिर्फ दवा द्वारा उपचार लंबे समय के लिए कारगर नहीं होते. बल्कि, मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों से मनोवैज्ञानिक उपचार भी साथ चलाने चाहिए, जिससे रोग का पूर्ण उपचार हो जाता है.
चर्चा में मनोवैज्ञानिक नर्स के महेश्वरन ने ग्रामीणों को सदर अस्पताल सासाराम में आकर उपचार कराने के लिए प्रेरित भी किया व नर्सिंग सेवा के बारे में विस्तार से बताया. वहीं, आंगनबाड़ी की सेविका शाहीन परवीन व सहायिका शाहिदा खातून के नेतृत्व में गांव के लोग कार्यक्रम में भाग लिये.
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