पूर्णिया में आदिवासी बच्चों की जिंदगी बदलने की पहल, शिक्षा के साथ मिल रहा संस्कार का सहारा
नारियल बगान स्थित वनवासी कल्याण आश्रम | Prabhat Khabar Network
पूर्णिया के वनवासी कल्याण आश्रम आदिवासी बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है. यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा और संस्कार दोनों प्रदान कर रही है. जानिए कैसे सामाजिक सहयोग से इन बच्चों का भविष्य संवारा जा रहा है.
Purnia Tribal Children: शिक्षा किसी बच्चे का भविष्य बदल सकती है, लेकिन आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां कई बार बच्चों को स्कूल से दूर कर देती हैं. खासकर समाज के उन वर्गों के बच्चों के लिए यह चुनौती और बड़ी हो जाती है, जो विकास की मुख्यधारा से अब भी पीछे हैं.
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पूर्णिया शहर के बक्साघाट नारियल बगान स्थित वनवासी कल्याण आश्रम ऐसे ही आदिवासी बच्चों के लिए उम्मीद की एक पहल बनकर सामने आया है. यहां करीब ढाई दर्जन बच्चों को सामाजिक सहयोग के माध्यम से नि:शुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके रहने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है.
पढ़ाई के साथ संस्कार देने की कोशिश
आश्रम में रहने वाले आदिवासी बच्चों को केवल शिक्षा से जोड़ना ही उद्देश्य नहीं है. संस्था की ओर से उन्हें संस्कार और सामाजिक मूल्यों से भी जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
बच्चों के लिए आवासीय व्यवस्था होने से उनके परिवारों पर शिक्षा और रहने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होता है. संस्था की नगर शाखा पूर्णिया की ओर से आश्रम में रहने वाले बच्चों की आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जाती हैं.
यह पहल उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके परिवारों के पास बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.
'आदिवासी समाज का देश की आजादी में रहा विशेष योगदान'
संस्थान की अध्यक्ष नीलम अग्रवाल का कहना है कि आदिवासी समाज का देश की आजादी की लड़ाई में विशेष योगदान रहा है. इसके बावजूद आज विकास की प्रक्रिया में समाज का एक बड़ा हिस्सा अंतिम पायदान पर खड़ा है.
उनके अनुसार आदिवासी बच्चों को शिक्षा से जोड़ना केवल किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. शिक्षा और विकास में सहयोग मिलने से इस समाज को मजबूती दी जा सकती है और बच्चों के लिए बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार किया जा सकता है.
सामाजिक सहयोग से चल रही बच्चों की व्यवस्था
आश्रम में बच्चों की व्यवस्था सामाजिक सहयोग से संचालित की जा रही है. संस्था के अध्यक्ष नीलम अग्रवाल के साथ सचिव प्रदीप अग्रवाल, उपाध्यक्ष आलोक लोहिया और आश्रम से जुड़े अन्य सदस्य भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं.
संस्था की कोशिश है कि बच्चों को ऐसी सुविधाएं मिलें, जिससे वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और भविष्य में अपने पैरों पर खड़े हो सकें.
सात बच्चों की जिम्मेदारी उठायेगी मारवाड़ी महिला समिति
इस पहल में सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी बढ़ रही है. मारवाड़ी महिला समिति, पूर्णिया शाखा ने आश्रम में रहने वाले सात बच्चों को गोद लेकर उनके खर्च का जिम्मा उठाया है.
ऐसे सहयोग से बच्चों की शिक्षा और देखभाल को निरंतरता मिल सकती है. साथ ही दूसरे सामाजिक संगठनों और सक्षम लोगों के लिए भी यह पहल प्रेरणा बन सकती है.
Purnia Tribal Children: समाज के सहयोग से बदल सकती है बच्चों की तस्वीर
वनवासी कल्याण आश्रम की पहल का केंद्र बच्चों की शिक्षा है, लेकिन इसका प्रभाव इससे कहीं व्यापक हो सकता है. किसी बच्चे को पढ़ाई का अवसर मिलना उसके पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ी के लिए बदलाव की शुरुआत बन सकता है.
संस्था की अध्यक्ष नीलम अग्रवाल ने सामाजिक सेवा से जुड़े लोगों से आदिवासी समाज के बच्चों की शिक्षा और विकास के लिए सहयोग करने की अपील की है. उनका मानना है कि सामूहिक प्रयास से इन बच्चों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है.
पूर्णिया में चल रही यह पहल फिलहाल करीब ढाई दर्जन बच्चों तक पहुंच रही है. जरूरत इस बात की है कि समाज के और लोग भी आगे आएं, ताकि शिक्षा की यह रोशनी अधिक बच्चों तक पहुंच सके.
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