पूर्णिया: खुश्कीबाग फलमंडी का संकटमोचन हनुमान मंदिर बना आस्था का केंद्र; दर्शन के बाद ही खुलते हैं दुकानों के शटर

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खुश्कीबाग फलमंडी का संकटमोचन हनुमान मंदिर

पूर्णिया के खुश्कीबाग फलमंडी में स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर 50 साल से श्रद्धालुओं और व्यापारियों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर व्यापारियों के लिए आत्मिक संबल है, जो दुकान खोलने से पहले यहां दर्शन करते हैं. मंगलवार को भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं, जो मनोकामना पूर्ति का विश्वास दिलाता है.

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सीमांचल के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों में शुमार पूर्णिया शहर के खुश्कीबाग फलमंडी स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं और व्यापारियों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. लगभग पांच दशक पुराने इस सिद्ध और जाग्रत मंदिर में प्रतिदिन सुबह से लेकर देर शाम तक पूजा-अर्चना का तांता लगा रहता है. धार्मिक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जो भी भक्त झोली फैलाता है, पवनपुत्र हनुमान उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं. खासकर मंगलवार के दिन पूरे मंदिर परिसर में आस्था और भक्ति का अद्भुत सैलाब देखने को मिलता है.

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दर्शन के बाद ही शुरू होता है दिनभर का कारोबार

पूर्णिया का खुश्कीबाग क्षेत्र पूरे कोशी-सीमांचल प्रमंडल की सबसे बड़ी फल एवं थोक सब्जी मंडी के रूप में विख्यात है, जहां प्रतिदिन तड़के से ही हजारों की संख्या में किसान, आढ़ती, खरीदार और खुदरा व्यापारी पहुंचते हैं. खुश्कीबाग मुख्य मार्ग से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क के किनारे और मंडी के केंद्र में स्थित यह मंदिर यहां के कारोबारियों के लिए आत्मिक संबल और वरदान समान है. स्थानीय व्यापारी अपनी दुकानों के शटर उठाने और गद्दी पर बैठने से पहले संकटमोचन के दरबार में हाजिरी लगाते हैं. व्यापारियों का दृढ़ विश्वास है कि प्रभु के दर्शन मात्र से दिनभर का कारोबार मंगलमय, सुगम और लाभप्रद रहता है.

मंगलवार को तड़के से ही लग जाती हैं लंबी कतारें

आम दिनों में भी सुबह और संध्या आरती के समय मंदिर परिसर शंख, घंटियों और हनुमान चालीसा के पाठ से गुंजायमान रहता है. मंगलवार का दिन यहां विशेष उल्लास लेकर आता है. इस दिन भोर से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं. श्रद्धालु प्रभु को चोला, सिंदूर, चमेली का तेल, लाल आंकड़े के फूल, नारियल और बूंदी के लड्डू अर्पित कर संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. मुख्य सड़क किनारे स्थित होने के चलते राहगीर और दोपहिया-चारपहिया वाहन चालक भी रुककर नमन किए बिना आगे नहीं बढ़ते.

पांच दशक पुराना इतिहास, हर वर्ग में है अटूट श्रद्धा

स्थानीय बुजुर्गों और दुकानदारों के अनुसार, यह मंदिर करीब पचास साल पुराना है. जैसे-जैसे खुश्कीबाग फलमंडी का विस्तार हुआ, वैसे-वैसे मंदिर के प्रति लोगों की आस्था भी प्रगाढ़ होती चली गई. आज यह मंदिर न केवल फलमंडी के व्यापारियों बल्कि पूरे शहर के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक पड़ाव बन चुका है, जहां दिनभर भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा का संचार रहता है.

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