पूर्णिया के मरंगा में आदित्यधाम सूर्य मंदिर: सात श्वेत घोड़ों के रथ पर सवार भगवान भास्कर की प्रतिमा, जानें इतिहास और परंपरा
मंदिर में भगवान सूर्य की प्रतिमा | Prabhat Khabar Network
पूर्णिया के मरंगा स्थित आदित्यधाम, भगवान सूर्य को समर्पित एक अनूठा आध्यात्मिक केंद्र बन गया है. सात श्वेत घोड़ों के रथ पर सवार सूर्यदेव की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं. यह धाम अपनी शांत वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है.
सीमांचल के प्रमुख केंद्र पूर्णिया में आध्यात्मिक शांति और सूर्य उपासना का एक अनूठा केंद्र इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है. शहर के मरंगा स्थित बियाडा परिसर के वीवीआईटी कैंपस में स्थापित 'आदित्यधाम' अपनी भव्यता और धार्मिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो चुका है.
रविवार के पावन दिन भगवान भास्कर की आराधना और दर्शन के लिए यहां सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है.
सात घोड़ों वाले रथ पर सवार सूर्यदेव की मनोहारी प्रतिमा
आदित्यधाम की सबसे प्रमुख विशेषता मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान सूर्य का दिव्य स्वरूप है:
- वैदिक प्रतीक: प्रतिमा में सूर्यदेव को पारंपरिक सात श्वेत घोड़ों वाले रथ पर सवार दिखाया गया है, जो सनातन वैदिक परंपरा और समय के सात चक्रों का प्रतीक माना जाता है.
- आध्यात्मिक सुकून: मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही शांत और हरियाली युक्त वातावरण मन को असीम शांति प्रदान करता है. रविवार के दिन यहां होने वाले विशेष मंत्रोच्चार और आरती से पूरा परिसर गुंजायमान रहता है.
सामने बना सुंदर तालाब, छठ महापर्व पर दिखता है अलौकिक नजारा
मंदिर की स्थापत्य कला और प्राकृतिक छटा श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है:
- मंदिर के सामने सरोवर: मंदिर के ठीक सामने एक स्वच्छ और सुंदर तालाब निर्मित है, जो परिसर की सुंदरता में चार चांद लगाता है.
- छठ और अचला सप्तमी पर रौनक: कार्तिक व चैत्र महीने के छठ महापर्व के दौरान हजारों व्रती इसी तालाब के पवित्र जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. इसके अलावा वसंत पंचमी के बाद आने वाली 'अचला सप्तमी' (सूर्य सप्तमी) पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और दीपोत्सव का भव्य आयोजन होता है.
2016 में हुई थी स्थापना, अब बन चुका है बड़ा धार्मिक केंद्र
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार इस धाम का इतिहास आधुनिक होते हुए भी अत्यंत समृद्ध है:
- निर्माण का इतिहास: इस भव्य मंदिर का निर्माण वर्ष 2016 में कराया गया था.
- नियमित धार्मिक अनुष्ठान: स्थापना के बाद से ही यहां नियमित रूप से हवन, रुद्राभिषेक और सूर्य वंदना का आयोजन होता है. वीकेंड पर शहर के लोग परिवार के साथ दर्शन और ध्यान लगाने पहुंचते हैं.
श्रद्धालु कैसे पहुंचें आदित्यधाम?
- लोकेशन: मंदिर पूर्णिया शहर से सटे मरंगा स्थित बियाडा (BIADA) इंडस्ट्रियल एरिया के भीतर वीवीआईटी (VVIT) कैंपस में स्थित है.
- सुगम आवागमन: पूर्णिया बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन से सीधे मरंगा बियाडा पहुंचा जा सकता है. मुख्य मार्ग से अंदर आते ही शांत वातावरण में मंदिर का शिखर सहज ही दिखाई देने लगता है.
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